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48 घंटे की बच्ची की हार्ट सर्जरी कर दिया नया जीवन

बच्ची को थी एओर्टा बीमारी, शरीर के निचले हिस्से में बाधित हो रहा था खून का प्रवाह

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48 घंटे की बच्ची की हार्ट सर्जरी कर दिया नया जीवन

जयपुर

शहर के एक निजी अस्पताल के विशेषज्ञों ने दो दिन की नवजात बच्ची की सफल हार्ट सर्जरी की है। डॉक्टरों की टीम ने इस जटिल सर्जरी को कई घंटे की मशक्कत के बाद पूरा किया। नवजात को को-आर्कटेशन ऑफ एओर्टा यानि सीओए नामक गंभीर ह्रदय बीमारी से पीड़ित थी। इस बीमारी में नवजात शिशु की महाधमनी का एक भाग काफी सिकुड़ने से शरीर के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित होने से बच्ची की जान को बड़ा खतरा था।

प्रसव से पहले फीटल ईको जांच में गर्भस्थ शिशु को भी बीमारी होने की संभावना जताई गई थी। इसके बाद अस्पताल के कार्डियक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. सीपी श्रीवास्तव, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के डॉ. प्रशांत महावर, एनेस्थीसिया के एचओडी डॉ. प्रदीप गोयल की टीम ने बच्ची की सफल सर्जरी कर जान बचाई। इस बच्ची की मां को भी जन्मजात ह्रदय बीमारी टीओएफ थी। चिकित्सकीय टीम ने मां का भी सफल ऑपरेशन किया था। जयपुर के नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल के कार्डियक विशेषज्ञों ने इसे राज्य का पहला मामला बताते हुए इतनी कम उम्र की बच्ची की इस तरह की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया।

मां को भी थी यह बीमारी
खास बात यह है कि जिस डॉक्टर ने मां की जन्मजात हार्ट विकृति को ठीक कर नया जीवन दिया, उसी ने उसकी बच्ची की बीमारी का भी सफल उपचार किया। इस बच्ची की मां को भी जन्मजात ह्रदय बीमारी टीओएफ थी। मां इसका ऑपरेशन करवा चुकी थी। फीटल ईको जांच में गर्भस्थ शिशु को भी बीमारी होने की संभावना जताई गई थी।

इसलिए करनी पड़ी सर्जरी
महाधमनी के सिकुड़ जाने से बच्ची के शरीर के निचले हिस्से में सामान्य रक्त प्रवाह में रुकावट आ रही थी। इस कारण लिवर, गुर्दे जैसे अंगों में रक्त संचालन कम हो रहा था। इस लिए बच्ची की जान बचाने के लिए जन्म के कुछ ही घंटों बाद डॉक्टर्स को जोखिमभरी जटिल सर्जरी करनी पड़ी।

दो घंटे में हुई सफल सर्जरी
जन्म के समय बच्ची का वजन 2 किलो 700 किलोग्राम था। की जन्मी शिशु को अस्पताल के नियोनेटल आईसीयू में गहरी निगरानी में रखा गया। जन्म के 24 घंटे बाद उसकी सभी नब्जों की ईको की जांच की गई। गंभीर बीमारी की पुष्टि होने पर सर्जरी से पहले कुछ विशेष दवाएं दी गईं। इसके बाद सर्जरी कर बच्ची की महाधमनी के संकुचित हिस्से को हटा कर ठीक किया गया। पूरी सर्जरी में दो घंटे में अंजाम दिया गया। बच्ची की हालत में अब सुधार है।