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एसएमएस अस्पताल में मरीज से मिलने जाने पर लगेगा टिकट, देने होंगे एक व्यक्ति के 50 रुपए

ई मित्र से होगा पंजीकरण, मरीज से मुलाकात का समय निर्धारण, ओपीडी में टोकन सिस्टम, ई-अपाइंटमेंट जैसी व्यवस्थाओं की नहीं करवा पाया पालना, 18 सितंबर को प्रस्तावित है बैठक

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एसएमएस अस्पताल में मरीज से मिलने जाने पर लगेगा टिकट, देने होंगे एक व्यक्ति के 50 रुपए

विकास जैन / जयपुर। सवाई मानसिंह अस्पताल ( SMS Hospital ) में मरीज से मिलने आने वाले परिजनों से 50 रुपए शुल्क के तौर पर लिए जा सकते हैं। अस्पताल प्रबंधन में भीड़ कम करने के उद्देश्य से यह शुल्क लागू करने का विचार किया है। दरअसल 18 सितंबर को होने वाली राजस्थान मेडिकल रीलिफ सोसायटी ( Rajasthan Medical Relief Society ) की बैठक में इस शुल्क का प्रस्ताव रखा जा सकता है। भीड़ में कमी करने के लिए एसएमएस अस्पताल अपनी तरह से कई तरह की प्लानिंग कर चुका है, लेकिन अपनी ही व्यवस्था को कभी लागू नहीं करवा पाया।


निशुल्क इलाज के लिए तो आते हैं अस्पताल

उधर, इस शुल्क को लेकर कई जगह अभी से विरोध भी उठ रहे हैं। दरअसल सवाईमानसिंह अस्पताल में आने वाले करीब 70 से 80 प्रतिशत गरीब या मध्यम वर्गीय होते हैं। इनमें से भी करीब 50 से 60 प्रतिशत सरकार की निशुल्क योजनाओ में चिह्नित गरीब श्रेणी के मरीज होते हैं। अब अस्पताल प्रशासन इन मरीजों और उनके परिजनों की आर्थिक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए यहां अस्पताल में मरीज से मिलने आने वाले परिजनों से ही 50 रुपए प्रति परिजन वसूली की तैयारी में जुट गया है।


10 करोड़ की आमदनी

राजस्थान पत्रिका ने अस्पताल की ओर से पिछले सालों के दौरान किए गए ऐसे उपायों की पड़ताल की तो सामने आया कि कुछ व्यवस्थाओं को अस्पताल प्रशासन ने नजर अंदाज कर दिया, तो कुछ को मरीज या उनके परिजनों के लिए सुगम बनाया ही नहीं गया। वहीं अब 50 रुपए शुल्क लगाया जाता है, तो अस्पताल को सालाना करीब 10 करोड़ रुपए की आय हो सकती है। अस्पताल में करीब 2500 मरीज हर समय भर्ती रहते हैं। जिनसे मिलने रोजाना औसतन दो परिचित भी आते हैं, तो मिलने आने वालों की संख्या 5000 हो सकती है। उधर, आरएमआरएस की बैठक में माइक्रोबायोलोजी, एंडोक्रायनोलोजी और ह्यूमेटोलोजी की कुछ नई जांचों और उनकी दरें तय करने का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है।

ई मित्र पंजीकरण को भुला ही दिया
करीब पांच साल पहले अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी में भीड़ कम करने के लिए ई मित्र से पंजीकरण की सुविधा शुरू की थी। उम्मीद थी कि इससे राजधानी जयपुर के विभिन्न हिस्सों से या प्रदेश के दूरदराज के हिस्सों से आने वाले मरीज और उनके परिजन ओपीडी पर्ची अपने साथ लाएंगे। जिससे उन्हें अस्पताल में आकर कतार में नहीं लगना पड़ेगा, वहीं अस्पताल में भी भीड़ कम हो जाएगी। इस व्यवस्था को अस्पताल प्रशासन सख्ती से लागू ही नहीं करवा पाया और ना ही मरीजों और परिजनों को इसके प्रति जागरूक कर पाया। आज भी राजधानी के अधिकांश लोगों को ही इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है।

टोकन सिस्टम

कई सालों से ओपीडी में टोकन सिस्टम लागू करने की बात अस्पताल प्रशासन कर रहा है। इस व्यवस्था से ओपीडी में बेवजह भीड़ कम हो सकती है। टोकन लेने के बाद अपना नंबर आने तक परिजन वहां ठहरने के बजाय इधर-उधर भी जा सकते हैं। लेकिन आज तक भी यह व्यवस्था यहां लागू नहीं हो पाई है।


आईपीडी में मुलाकात का समय, वीआईपी के परिजनों पर नियंत्रण नहीं

अस्पताल प्रशासन ने भर्ती मरीजों से मिलने का समय निर्धारित किया हुआ है। इसकी पालना भी सख्ती से नहीं होती। कई बार निर्धारित समय के अलावा भी रसूखदार लोग पहुंचते हैं। वीआईपी के भर्ती होने पर उससे मिलने वालों पर अस्पताल प्रशासन कोई लगाम नहीं लगा पाता।

आमजन भी यह रखें ध्यान, तो अस्पताल रहेगा भीड़ मुक्त

- बेहद आवश्यक होने पर ही मरीज से मिलने के लिए अस्पताल में जाएं।

- वार्ड या आईसीयू के अंदर जाकर मरीज से मिलने की जिद ना करें।

- मरीज से मुलाकात के लिए डॉक्टरों या अन्य स्टाफ से बहस नहीं करें।

- मरीज की देखरेख में जुटे अन्य परिजनों से भी मरीज के स्वास्थ्य की जानकारी ली जा सकती है।

- अस्पताल में मुलाकात के समय मास्क का उपयोग करें।

- छोटे बच्चे को साथ लेकर नहीं जाएं।

- बिना पूछताछ अनावश्यक खाद्य सामग्री मरीज के लिए अस्पताल में लेकर नहीं जाएं।

- अस्पताल में जाएं तो गंदगी नहीं फैलाएं।

50 रूपए शुल्क पहले हम उसमें आने वाली बाधाओं को भी देखेंगे। यदि शुल्क लगाया जाना तर्क संगत और व्यावहारिक होगा तो ही लगाया जाएगा। कुछ विभागों में नई जांचों के लिए सामान्य मरीजों की दरें भी तय की जानी है।

डॉ.डी.एस.मीणा, अधीक्षक, सवाईमानसिंह अस्पताल