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पांच हजार किमी सडकों पर युनूस खान और भजन लाल जाटव के बीच रार

प्रदेश की 5000 किमी सड़कें नेशनल हाईवे की घोषणा का कर रही इंतजार  

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पांच हजार किमी सडकों पर युनूस खान और भजन लाल जाटव के बीच रार

पांच हजार किमी सडकों पर युनूस खान और भजन लाल जाटव के बीच रार

अरविन्द सिंह शक्तावत
जयपुर. प्रदेश की पांच हजार किलोमीटर सड़कें नेशनल हाईवे की घोषणा का इंतजार कर रही हैं। भाजपा सरकार के समय सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान ने कहा कि हमारी सरकार ने सैद्धांतिक सहमति तो दिलवा दी, लेकिन सरकार बदल गई। इस सरकार ने साढ़े तीन साल में इस मामले में तीस मिनट भी नहीं दिए। मुख्यमंत्री, पूर्व उपमुख्यमंत्री के पास ये विभाग रहा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। वहीं, सार्वजनिक निर्माण मंत्री भजन लाल जाटव ने तत्कालीन भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि चुनावी फायदे के लिए सैद्धांतिक सहमति की थोथी घोषणा करवा दी गई। सीएम चार-पांच पत्र लिख चुके हैं। मैं दिल्ली जाकर इस मामले में सबसे मिल चुका हूं, लेकिन आश्वासन ही मिला। इस मुद्दे पर पत्रिका ने दोनों नेताओं से बात की।

सीएम, पूर्व डिप्टी सीएम के पास विभाग रहा, तीस मिनट भी इस मामले पर नहीं दिए: खान

आपके समय में 5000 किमी सड़कों को नेशनल हाईवे बनवाने की सैद्धांतिक सहमति दिलवा दी, लेकिन हुआ कुछ नहीं ?
आप जिन सड़कों की बात कर रहे हैं। हमने अपने स्तर पर रिपोर्ट तैयार करवाई और मुख्यमंत्री से अनुमति के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजे थे। इन सड़कों को नेशनल हाईवे घोषित करने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सैद्धांतिक सहमति दे दी। इसके बाद सरकार चली गई। तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के पास यह विभाग आया, लेकिन उन्होंने इस मसले पर ध्यान नहीं दिया। फिर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास यह विभाग रहा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब विभाग को मंत्री भी मिल गया, लेकिन वे भी कुछ नहीं कर पाए। सच तो यह है कि कभी भी दिल्ली जाकर पांच हजार किमी सड़कों को नेशनल हाईवे बनाने की दिशा में इस सरकार ने ठोस बातचीत नहीं की।
क्या आप की सरकार ने एनएच घोषित करने के नियमों की पूरी पालना कर प्रस्ताव दिल्ली भेजे थे?
आप ये बताओ कि प्रदेश से आठ लेन के दो एक्सप्रेस-वे जा रहे हैं, क्या ये ट्रैफिक को देखते हुए बनाए गए हैं। इन रोड को बनाने से पहले यहां जीरो ट्रैफिक था। वसुंधरा राजे और नितिन गडकरी ने आपस में बैठकर राजस्थान में औद्योगिक विकास को लेकर चर्चा की थी। इसी आधार पर सैद्धांतिक सहमति दी। नियम तो होते हैं, लेकिन आगे ट्रैफिक की संभावनाओं को देखते हुए भी काम होते हैं।
पीडब्ल्यूडी मंत्री का आरोप है कि चुनावी फायदे के लिए इन सड़कों के नेशनल हाईवे के प्रस्ताव बना कर भेज दिए गए?
हमने बहुत सारी सड़कें बनाई। हाइवेज नेशनल प्रॉपर्टी होती है। इस पर पूरे राष्ट्र के वाहन चलते हैं। प्रदेश में कहीं बजरी निकल रही है तो कहीं मार्बल निकल रहा है। यदि नेशनल हाईवे होगा तो तेजी से औद्योगिक विकास होगा। इसमें राजनीति की बात कहां से आ गई। प्रदेश के विकास के लिए यह प्रस्ताव भेजे गए थे। यदि राज्य सरकार कहेगी तो मैं खुद नितिन गडकरी के पास जाकर कहूंगा कि इन सड़कों को नेशनल हाईवे घोषित करें। पूरा जोर लगाऊंगा। यहां तक कि गडकरी से बात कर मीङ्क्षटग भी तय करवा दूंगा। मुझे कोई राजनीतिक लाभ नहीं लेना।

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चुनावी फायदे के लिए घोषणा की, अब मिला आश्वासन: जाटव

राज्य की पांच हजार किमी सड़कें अभी तक भी नेशनल हाईवे घोषित नहीं हो सकी है?
प्रदेश में विधानसभा चुनावों के समय केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी आए और उनसे तत्कालीन प्रदेश की भाजपा सरकार ने पांच हजार किलोमीटर सड़कों को नेशनल हाईवे बनवाने की सैद्धांतिक सहमति की घोषणा करवा दी, लेकिन सच तो यह है कि ये सिर्फ थोथी घोषणा ही थी। सैद्धांतिक सहमति दे देने से कोई सड़क नेशनल हाईवे नहीं बनता। उसके आगे भी काम करना होता है।
प्रदेश में साढ़े तीन साल से आपकी सरकार है, क्या किया?
मुख्यमंत्री ने खुद चार-पांच पत्र लिखे हैं और मांग की है कि जल्द से जल्द इन सड़कों को नेशनल हाईवे घोषित करें, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। दिल्ली से किसी तरह की ठोस कार्यवाही नहीं हुई। आखिरकार राज्य सरकार ने ही इन पांच हजार किमी सड़कों मे से करीब 400-500 किमी सड़कों को विकसित करने का काम शुरू कर दिया है।
सार्वजनिक निर्माण मंत्री का आरोप है कि आपकी सरकार ने कुछ नहीं किया?
मैं खुद इस मामले में दिल्ली जाकर आया था, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिलता है। काम की कोई बात नहीं निकल कर आती। प्रदेश की जनता ने भाजपा को 25 सांसद दे रखे हैं। उन्होंने आज तक क्या किया है? युनूस खान को इतनी ही ङ्क्षचता है तो वे खुद जाकर नितिन गडकरी से मिलें और इन सड़कों को नेशनल हाईवे घोषित करवाएं।