
नई दिल्ली. भारत की 53 फीसदी शहरी महिलाएं घरेलू कामों के बोझ के कारण दिन में एक बार भी घर से बाहर नहीं निकलतीं। 'जेंडर गैप इन मोबिलिटी आउटसाइड होम इन अर्बन इंडियाÓ रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय महिलाएं तभी घर से बाहर जाती हैं, जब कोई खास वजह हो जबकि पुरुषों के लिए यह जरूरी नहीं। देश में पुरुषों और महिलाओं के बीच गतिशीलता में व्यापक अंतर है। भारत के शहरों पर केंद्रित इस अध्ययन में लगभग 84,207 महिला और 88,914 पुरुष शामिल थे।
पुरुषों और महिलाओं की गतिशीलता में बड़ा अंतर यह शोध समय उपयोग सर्वेक्षण (टीयूएस) के 2019 के निष्कर्षों पर आधारित है, जिसमें देश के 1.38 लाख से अधिक परिवारों को शामिल किया गया था। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) दिल्ली से जुड़े राहुल गोयल के शोध में पाया गया कि एक दिन में 47 प्रतिशत महिलाएं ही कम से कम एक बार घर से बाहर निकलती हैं। वहीं, बाहर जाने वाले पुरुषों का अनुपात लगभग 87 फीसदी था। इसका अर्थ है कि बेहद सीमित संख्या में ही पुरुष किसी दिन घर पर होते हैं।
शिक्षा प्रणाली से बाहर होते ही कदमों पर पहरा
शिक्षा में नामांकित 81त्न लड़कियां व महिलाएं दिन में कम से कम एक बार बाहर कदम रखती हैं, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 90 फीसदी है। हालांकि एक बार जब वे शिक्षा प्रणाली से बाहर हो जाती हैं, तो उनके घर से बाहर कदम रखने की संभावना रोजगार के परिणामों पर निर्भर करने लगती है। ऐसी महिलाएं जो न तो नौकरी करती हैं और न ही पढ़ती हैं, उनमें 70 फीसदी दिन में एक बार भी घर की दहलीज पार नहीं करतींं। दूसरी ओर, काम न करने वाले महज 35 प्रतिशत पुरुष ही घर में रहते हैं।
महिलाओं के पास रोजगार के अवसर कम
उम्र बढऩे के साथ-साथ पुरुषों और महिलाओं, दोनों का ही शिक्षा में नामांकन घटने लगता है और 25 वर्ष की आयु के बाद बेहद कम हो जाता है। इस उम्र में पुरुषों के रोजगार में काफी वृद्धि होती है, पर महिलाओं के लिए अवसरों में कोई तेजी नहीं आती। आंकड़े बताते हैं कि 26 वर्ष की आयु में 80.7प्रतिशत पुरुषों के पास नौकरी थी, पर महिलाओं के संबंध में यह आंकड़ा 19.1प्रतिशत था। कामकाजी उम्र के दौरान और रिटायरमेंट (60 वर्ष) से पहले पुरुषों व महिलाओं के रोजगार के बीच की खाई व्यापक बनी हुई है। रोजगार के अवसर गतिशीलता को प्रभावित करते हैं।
Published on:
28 Feb 2023 07:11 pm
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