34 साल अपने ही बच्चे की हत्या का आरोप सहा, पति ने कर ली दूसरी शादी, अब हाईकोर्ट ने किया बरी

उच्च न्यायालय से मिला इंसाफ: 20 साल की प्रेमकंवर हो गई 54 वर्ष की, 34 साल बाद अपने ही बच्चे की हत्या के आरोप से बरी हुई प्रेमकंवर, हत्यारिन कह पति ने भी त्यागा, रोते हुए बोली अब मैं चैन से सो सकती हूं

कमलेश अग्रवाल / जयपुर। अपने ही जिगर के टुकड़े की हत्या के आरोप के कारण जिंदगी के 34 साल लोगों के ताने सुनकर निकालने वाली और पति की ठुकराई प्रेम कंवर को आखिरकार इंसाफ मिल गया। उस पर जब यह दाग लगा, तब वे 20 साल की थी। आज 54 साल की हो गई है। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश एनएस ढड्डा ने गुरुवार को फैसला देते हुए प्रेमकंवर को बरी कर दिया। अपने ही बच्चे की हत्या का दर्द सहने वाली प्रेमकंवर हालांकि जमानत मिलने से सलाखों के बाहर थी, लेकिन निर्दोष होते हुए भी हत्यारिन का तमगा लेकर घूम रही थी।

1989: दोषी करार दे दी थी आजीवन कारावास की सजा

थाना मालपुरा में 1986 में मुखबीर ने सूचना दी थी कि पचेवर के तालाब में शिशु की लाश पड़ी है। किसी महिला ने पैदाइश छुपाने के लिए लाश को वहां पर डाला है। पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। इसके बाद सूचना के आधार पर प्रेमकंवर को पुलिस ने गिरफ्तार किया और न्यायालय में चालान पेश किया। पति सहित अन्य ससुराल वालों की गवाही के आधार पर न्यायालय ने 6 जुलाई 1989 को प्रेमकंवर को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। जिसकी अपील उच्च न्यायालय में की गई थी। उच्च न्यायालय ने महिला की सजा को स्थगित करते हुए जमानत पर रिहा कर दिया।

1987: बिना तलाक पति ने कर ली दूसरी शादी

प्रेमकंवर पर अपने ही बच्चे की हत्या का आरोप लगाया। ससुराल से निकाले जाने के बाद पीहर आ गई। इसके बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया। मामला न्यायालय तक पहुंचा। ट्रायल के बाद आजीवन कारावास की सजा न्यायालय ने सुनाई। माता-पिता ने जैसे-तैसे बेटी को जमानत दिलवाई। गरीबी और अशिक्षा के साथ कानूनी अधिकारों की जानकारी होने की वजह से प्रेमकंवर को ससुराल पक्ष की ओर से कोई मदद नहीं मिली।घटना के एक साल बाद ही प्रेमकंवर के पति की बिना तलाक के दूसरी शादी करवा दी गई।


2019: न्यायालय आगे आया, न्यायमित्र दिया

1989 में दायर की गई प्रेमकंवर की अपील राजस्थान उच्च न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। मामले की संवेदनशीलता देखते हुए न्यायालय ने अधिवक्ता शालिनी शेरॉन को न्याय मित्र नियुक्त किया। उस वक्त किसी को यह भी नहीं मालूम था कि प्रेमकंवर जिंदा भी है या नहीं। इस पर न्यायमित्र ने विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता से केंद्र से जानकारी जुटाने की कोशिश की। सरकारी वकील के पत्र पर थाना मालपुरा ने 4 जनवरी को रिपोर्ट दी कि महिला गांव में रहती है। न्यायमित्र शालिनी शेरॉन ने कहा कि ससुराल वालो की गवाही पर प्रेमकंवर को दोषी करार दिया गया। जबकि मामला पुनर्विवाह या दहेज प्रकरण से जुड़ा हो सकता है। घटना के एक साल के भीतर ही प्रेमकंवर के पति ने दूसरा विवाह कर लिया।

पता चला तो रोने लगी

पत्रिका ने प्रेमकंवर से न्यायमित्र के जरिए बात की। मामले में बरी होने की जानकारी मिलने पर रोने लगी और बोली मैं अब चैन से सो सकती हूं। सालों निकल गए, जेल में गुजारे दिन और आरोपों की वजह से कभी पूरी तरह से नींद नहीं आई। प्रेमकंवर ने बताया कि करीबन तीस साल पहले ससुराल वालो ने निकाल दिया था। इसके बाद घर आ गई। मां बाप थे, तब तक फिर भी सहारा था लेकिन इसके बाद सब खत्म हो गया। खेतों में काम करके जीवन काट रही हूं।

pushpendra shekhawat Desk
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