
demo image
जयपुर.कुरआन मजीद में सूरह बकरा आयत 185 से मालूम होता है कि ये आसमानी किताब माहे रमजान में उतारी गई है। लोगों के लिए रोशनी, हिकमत और शिफा है। ये जिंदगी गुजारने का तरीक बताती है। जिंदगी का संविधान व नियम कानून है, आसमानी कानून है, अच्छे बुरे में फर्क व तमीज करती है। ये मालिक की किताब भी है, कलाम भी है और सिफत भी। इसलिए इस महीने में कुरआन की तिलावत बढ़ा देनी चाहिए। इसके एक-एक हुरूफ पढऩे पर दस नेकियां मिलती हैं। मुमकिन हो सके तो तर्जुमा व मतलब पढ़ा जाए या आलिमों और जानकारों से मालूम किया जाए। मालिक के हुक्मों को जानने के लिए उसके कलाम से बढकऱ कुछ नहीं।
इस बार सामूहिक इफ्तार नहीं
लॉकडाउन के कारण इस बार सामूहिक इफ्तार कर परंपरा भी अधूरी रह गई। लोग इस बार घरों में ही सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर रोजा इफ्तार कर रहे हैं। हर साल बड़े स्तर पर सामूहिक रोजा इफ्तार की दावतें होती थीं।
Published on:
10 May 2020 06:31 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
