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अबला जीवन हाय तुम्हारी यहीं कहानी…आंचल में दूध और आंखों में पानी

पोक्सो में दर्ज मामलों में पीडि़ता की उम्र का निर्धारण करवाने के लिए भटक रही है 30 थानों की पुलिसकई मामलों में एक माह बाद मिली रिपोर्ट, पुलिस की जांच में बढ़ी परेशानी

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देवेन्द्र शर्मा शास्त्री

जयपुर। कवि मैथली शरण की कविता ...अबला जीवन हाय तुम्हारी यहीं कहानी...आंचल में दूध और आंखों में पानी। वर्षों पहले अभिशप्त महिलाओं की स्थिति का चित्रण करने के लिए लिखी गई थी, लेकिन प्रताडऩा के दौर से गुजर रही किशोरियों के जीवन पर आज भी सटीक बैठती है। नाबालिक बालिका से बलात्कार पर सजा के लिए सरकार ने कड़ा कानून पोक्सो बना दिया। जांच पूरी करने के लिए दो माह का समय भी तय कर दिया गया, लेकिन जयपुर शहर के करीब तीस थानों की पुलिस ऐसी बालिकाओं की उम्र का निर्धारण करवाने के लिए एक माह तक भटकती रहती है। आयुक्तालय से लेकर चिकित्सा विभाग तक पत्र व्यवहार चलने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया।

उम्र से होता है अपराध परिभाषित

पोक्सो अपराध उम्र के हिसाब से तय होता है। अधिकतर मामलों में पीडि़ता की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच होती है। इन मामलों में परिजनों की ओर से उम्र संबंधी दस्तावेज पेश नहीं किए जाने पर पुलिस के लिए परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में पुलिस को चिकित्सकीय जांच के साथ उम्र का भी निर्धारण करवाना होता है। इन मामलों में शहर के बाहरी थानों की पुलिस को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

एक माह तक पीडि़ता को लेकर घूमती रहीं पुलिस

शहर के प्रतापनगर थाने में दर्ज दो मामलों से इस स्थिति को समझा जा सकता है। पुलिस के अनुसार 23 अप्रेल को 16 वर्ष की बालिका से बलात्कार का मामला दर्ज करवाया गया। पुलिस पीडि़ता को लेकर उसी दिन प्रताप नगर के छह व 11 नंबर सैक्टर स्थित पीएचसी पहुंची। वहां उपस्थित चिकित्सकों ने बलात्कार संबंधी मेडिकल तो कर दिया, लेकिन उम्र के निर्धारण के लिए एक्सरे लिख दिया। थानाधिकारी मानवेन्द्र सिंह चौहान का कहना है कि एक्सरे व उम्र संबंधी रिपोर्ट के लिए सांगानेर व जयपुरिया अस्पताल में चक्कर काटते रहे। बाद में अधिकारियों की ओर से सीएमएचओ को पत्र लिखा तो एक माह बाद 22 मई को पीडि़ता की उम्र संबंधी रिपोर्ट मिल पाई।

उम्र की जांच के लिए उड़ीसा भेजी गई टीम

उड़ीसा की रहने वाली किशोरी की प्रतापनगर थाना इलाके में शादी करवादी गई। शादी के बाद पीडि़ता ने स्वयं को नाबालिक बताते हुए 9 मई को पोक्सो के तहत मामला दर्ज करवाया, लेकिन उम्र संबंधी कोई दस्तावेज पेश नहीं किया। पुलिस पहले तो पीडि़ता को लेकर उम्र की जांच के लिए अस्पतालों में घूमती रही। बाद में उड़ीसा टीम भेजकर उसकी उम्र के दस्तावेज मंगवाए गए।

पद समाप्त होने से बढ़ी परेशानी

प्रतापनगर थानापुलिस की ओर से पहले बलात्कार संबंधी मामलों में मेडिकल मुआयना एवं मृग प्रकरणों में शव का पोस्टमार्टम महात्मा गांधी अस्पताल में पदस्थापित मेडिकल ज्यूरिस्ट से करवाया जाता था। लेकिन यहां पर मेडिकल ज्यूरिस्ट का पद समाप्त होने से यह परेशानी बढ़ गई है। इसके बाद सरकार की ओर से बलात्कार संबंधी मेडिकल व पोस्टमार्टम के लिए अस्थाई रूप से सैक्टर 6 व 11 में स्थित पीएचसी को तय कर दिया गया। लेकिन दोनों की जगह एक्से व जांच की व्यवस्था नहीं है।