
.अब 'उधार' ली हुई 'किताब' से नहीं 'पढेंगे' आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे
—पिछले साल की तुलना में लगभग 5 लाख किताबें अधिक बंटेगी
—अनुमानित संख्या के आधार पर 12 लाख किताबें छपने का आॅर्डर
—आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 साल के बच्चे ले रहे हैं प्री—स्कूल एजुकेशन
टीना बैरागी शर्मा
जयपुर
प्रदेश के ऐसे मासूम बच्चे जो आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से प्री—स्कूल एजुकेशन ले रहे है। उन्हें अब समझौता करके किसी दूसरे की किताब से पढ़ाई करने को मजबूर नहीं होना पड़ेगा। बल्कि इस साल उनके हाथों में खुद की किताबें होंगी। सरकार ने पिछले सालों में हुई लापरवाही से सबक लेते हुए इस बार प्रत्येक केंद्र पर आने वाले बच्चे का सर्वे कराया है। इस दौरान लगभग 15 लाख बच्चों की संख्या सामने आई है। जबकि अनुमानित संख्या 12 लाख बच्चों की है। इस आधार पर फिलहाल किताबें छपने का आॅर्डर दिया जा चुका है। लेकिन सर्वे के बाद आने वाली रिपोर्ट को आधार मानते हुए विभाग ने 3 से 6 साल के बच्चों को किलकारी, उमंग और तरंग किताबें देने का फैसला किया है। इस लिहाज से ये संख्या 15 लाख के आसपास आंकी गई है। अब इन किताबों की मदद से ही ये बच्चे क, ख, ग ए बी सी डी और 1..2.., 3 व 4 पढ़ सकेंगे।
विभाग की मानें तो हर साल आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री—स्कूल एजुकेशन लेने वाले 3 से 6 साल के बच्चों को किताबें बांटी जाती है। लेकिन सितंबर 2016 में 10 लाख बच्चों को ही किताबें बांटी गई थी और साढ़े तीन लाख बच्चे किताबें मिलने से वंचित रह गए थे। ये संख्या विभाग को आंगनबाड़ी केंद्रों से बाद में भेजी गई थी। और विभाग ने किताबें खराब होने के डर से अंदाजे से ही दस लाख बच्चों के हिसाब से किताबें छपवा ली थी। इसके बाद पिछले साल भी वास्तविक संख्या नहीं मिलने से विभाग की ओर से बांटी गई किताबें कम पड़ गई थी। इससे सबक लेते हुए ही विभाग ने इस बार सभी केंद्रों पर आने वाले उन बच्चों का सर्वे कराया था जो शिक्षा ले रहे है।
नियमानुसार— समेकित बाल विकास सेवा के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों एवं मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्री—स्कूल एजुकेशन ले रहे बच्चों के लिए किलकारी, उमंग और तरंग किताबें पढ़ने को दी जाती है। ये किताबें हर साल जिला कार्यालयों को भेजी जाती है। यहीं से ये किताबें केंद्रों पर बच्चों तक पहुंचती है।
विभाग का तर्क—
हालांकि किताबें कम छपवाने के पीछे विभाग ने ये तर्क दिया कि बच्चों की संख्या में किताबें अधिक छपवाने से उनके खराब होने का डर रहता है। इसलिए हर साल किताबें कम ही छपवाई गई। इस बार बच्चों की संख्या का सर्वे कराने को प्राथमिकता दी गई। ताकि कोई भी बच्चा किताब लेने से वंचित ना रहे।
फैक्ट फाइल—
प्रदेश में हैं 63 हजार आंगनबाड़ी केंद्र एक केंद्र पर 15 से 20 बच्चे प्रतिदिन आते
Published on:
19 Jul 2018 11:00 am
