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रात 1 बजे दलाल पकड़ा, दोपहर 2 बजे तक गोपाल केसावत के बुलावे का इंतजार करती रही एसीबी

आरपीएससी परीक्षा पास कराने के नाम पर 18.50 लाख की घूस ली थी दलालों ने। सबका बंटा हुआ था हिस्सा। पूर्व राज्यमंत्री गोपाल केसावत को देने थे साढ़े सात लाख रुपए। सीकर में दलालों को पकड़ने के बाद राज्य घूमंतु जाति कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गोपाल केसावत ने शनिवार दोपहर को बुलाया अपने घर। दलाल के साथ पहुंची एसीबी ने टीम ने पकड़ा रंगे हाथ। कांग्रेस के गत कार्यकाल में था गोपाल को राज्यमंत्री का दर्जा।

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रात 1 बजे दलाल पकड़ा, दोपहर 2 बजे तक गोपाल केसावत के बुलावे का इंतजार करती रही एसीबी

रात 1 बजे दलाल पकड़ा, दोपहर 2 बजे तक गोपाल केसावत के बुलावे का इंतजार करती रही एसीबी

जयपुर। भष्ट्राचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने आरपीएससी की 15 मई को हुई अधिशासी अधिकारी (ई.ओ) भर्ती परीक्षा में पास कराने के नाम रिश्वत के खेल का भांडाफोड करने के लिए घंटो इंतजार किया। पहले तो ट्रेप की कार्रवाई 13 जुलाई को होनी थी, लेकिन दलाल इसके लिए तैयार नहीं हुए। इसके बाद एक दलाल ने शुक्रवार शाम को रुपए स्वीकार कर लिए। एक-एक कर एसीबी रिश्वत की तीन कड़ी तक शुक्रवार रात एक बजे तक पहुंच गई। हालांकि इसके आगे गोपाल केसावत को पकड़ने के लिए इंतजार करना पड़ा। उसका मोबाइल बंद होने से दलाल का सम्पर्क नहीं हो सका। एसीबी ने तीन दलाल व रिश्वत की रकम लेकर पूरे मामले को गोपनीय बनाए रखने में सफलता अर्जित की। अगले दिन शनिवार दोपहर केसावत ने दलाल को अपने घर बुला लिया। इसके बाद प्रताप नगर स्थित उसके घर से एसीबी ने उसे साढ़े सात लाख रुपए लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार गोपाल केसावत प्रताप नगर में कुम्भा मार्ग, ब्रह्मप्रकाश दिल्ली, अनिल कुमार धरेन्द्र सीकर के हनुमानगढ़ टाउन तथा रवीन्द्र शर्मा टिब्बी निवासी है। गोपाल केसावत को कांग्रेस के गत कार्यकाल में घूमंतु जाति कल्याण बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था।हुआ यूं कि परिवादी ने सात जुलाई को ही शिकायत दी थी। उसके बेटे को अधिशासी अधिकारी भर्ती परीक्षा पास करवाने के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही थी। आरोपियों ने उसकी ओएमआर सीट बदलने का झांसा दिया। इस पर उप अधीक्षक राजेश जांगिड़ ने सत्यापन की कार्रवाई की।

40 लाख मांगे, 25 में सौदा तय हुआ, हर कड़ी का बंटा था हिस्सा

सत्यापन में सामने आया कि आरोपियों ने पहले 40 लाख रुपए मांगे। परिवादी ने कहा कि वह इतनी रकम देने में समर्थ नहीं है। इस पर मामला 25 लाख रुपए में तय हुआ। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने ट्रेप की कार्रवाई की तैयारी की। ट्रेप 13 जुलाई को होना था, लेकिन दलाल तैयार नहीं हुए। शुक्रवार को परिवादी 18.50 लाख रुपए लेकर गया तो पहले अनिल ने रिश्वत ली। इसके बाद उसने बताया कि मैं ब्रह्मप्रकाश को जानता हूं। आगे के बारे में वही बताएगा। एसीबी ने के सामने अनिल ने उससे बात की तो वह रुपए लेने के लिए तैयार हो गया। उसे दबोचा तो रवीन्द्र का नाम आया। रात 12 बजे बाद रवीन्द्र को रिश्वत की यह रकम लेते हुए पकड़ा। पूछताछ में उसने बताया कि रुपए ऊपर तक पहुंचाने हैं। उसने गोपाल केसावत का नाम लिया। केसावत 50 हजार रुपए यूपीआई के माध्यम से लिए। इसके बाद अन्य रकम के लिए घर बुला लिया। यहां शनिवार दोपहर उसने रिश्वत में से 7.50 लाख रुपए ले लिए, जिसके बाद एसीबी ने उसे पकड़ लिया।

गिरफ्तारी से पहले सोशल मीडिया पर लिखा...

खोटे सिक्के जो खुद चले नहीं बाजार में

वो भी कमियां खोज रहे हैं मेरे किरदार में...

यह टिप्पणी करने के बाद उसने पीसीसी राजस्थान की ओर से की गई पोस्ट को शेयर किया, जिसमें नवनियुक्त पदाधिकारियों की कांग्रेस अध्यक्ष, प्रदेश प्रभारी व सहप्रभारियों के साथ फोटो थी।