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ACB News: मुखिया एक… फिर भी पुलिस के 39 भ्रष्टों की अभियोजन स्वीकृति का इंतजार, कैसे रूकेगा भ्रष्टाचार

एसीबी अधिकारियों ने इन भ्रष्ट कार्मिकों की अभियोजन स्वीकृति के लिए संबंधित अधिकारियों व एजेन्सी को पत्र भी लिखा। इसके बावजूद 39 पुलिस अधिकारी व कार्मिकों की अभियोजन स्वीकृति लंबित है।

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भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, पत्रिका फोटो

मुकेश शर्मा

Rajasthan Acb: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने विभिन्न सरकारी विभागों में कई भ्रष्ट अधिकारी व कार्मिकों के खिलाफ एक के बाद एक कार्रवाई की। बड़ी संख्या में सरकारी विभागों के मुखिया भ्रष्टों की अभियोजन स्वीकृति नहीं देकर उनको बचाने में लगे रहते हैं। वहीं पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में भ्रष्ट अधिकारी व कार्मिकों की अभियोजन स्वीकृति भी लंबित है।
इतना ही नहीं एसीबी अधिकारियों ने इन भ्रष्ट कार्मिकों की अभियोजन स्वीकृति के लिए संबंधित अधिकारियों व एजेन्सी को पत्र भी लिखा। इसके बावजूद 39 पुलिस अधिकारी व कार्मिकों की अभियोजन स्वीकृति लंबित है।

दोनों विभागों के मुखिया एक

राजस्थान पुलिस के मुखिया यू.आर. साहू के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद एसीबी के डीजी डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया है। एसीबी व पुलिस विभाग में चर्चा है कि अब दोनों विभाग के मुखिया एक ही है। इसलिए डीजीपी मेहरड़ा को भ्रष्ट अधिकारी व कार्मिकों की लंबित अभियोजन स्वीकृति को जारी करवाना चाहिए ताकि सख्त
संदेश दिया जा सके। डीजीपी मेहरड़ा ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को अभियोजन स्वीकृति के लंबित प्रकरणों का जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोर्ट में केस चल सके।

कार्रवाई के लिए करनी पड़ती मशक्कत

एसीबी को भ्रष्ट अधिकारी व कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई करवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। इसके बावजूद भ्रष्टों को बचाने वाले भी सक्रिय हो जाते हैं। पुलिस विभाग में ऐसे कई भ्रष्ट है, जिन्हें एसीबी ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा, रिश्वत की मांग की या फिर अन्य भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी हैं।

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एसीबी ने ऐसे कई कार्मिकों के खिलाफ संबंधित पुलिस अफसर से अभियोजन स्वीकृति मांगी, लेकिन अफसर ने अभियोजन स्वीकृति देने से इनकार किया। तब प्रमुख शासन सचिव गृह एवं मुख्य सतर्कता राजस्थान सरकार को पत्र भेजा। इसके बाद पुलिस विभाग में संबंधित अफसर को पत्र भेजा। फिर भी अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली तो गृह विभाग के ग्रुप प्रथम के वरिष्ठ उप शासन सचिव को पत्र लिखा।
इतना ही नहीं केंद्रीय विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) को कई प्रकरणों में छह बार पत्र लिख चुकी। इसके बावजूद अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली। अब एसीबी अधिकारियों की नजर कार्यवाहक डीजीपी पर टिकी है।

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