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Vikram Samvat 2077 — सर्व पितृमोक्ष अमावस्या और नवरात्र में 30 दिनों का अंतर, दीवाली में भी आई ये अड़चन

कई व्रत, त्योहारों पर भी असर पड रहा है। कई बड़े पर्व की भी स्थितियां बदल रहीं हैं।

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जयपुर।
25 मार्च को विक्रम संवत 2077 यानि नव संवत्सवर शुरू होगा। 2077 को प्रमादी संवत्सर नाम दिया गया है। प्रमादी संवत के राजा बुध होंगे और मंत्री चंद्रमा होंगे। विक्रम संवत 2077 में अधिमास होगा यानि इस साल 12 माह की बजाए 13 चंद्र माह होंगे। अधिमास को पुरुषोत्तम मास या मल मास भी कहा जाता है।

दरअसल हर तीन साल में एक अधिमास आता है। ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि सौर वर्ष 365 दिन और चंद्र वर्ष 354 दिन का होता है। इससे हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो तीन साल में बढ़कर करीब एक माह का हो जाता है। इस अंतर को कम करने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है। सौर मास और चंद्र मास में संतुलन बनाने के लिए इस साल अश्विन का अधिक मास रहेगा, जो 17 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। आश्विन अर्थात क्वार के दो महीने होंगे।

अश्विन का अधिक मास होने से इन माहों के आसपास आनेवाले कई व्रत, त्योहारों पर भी असर पड रहा है। कई बड़े पर्व की भी स्थितियां बदल रहीं हैं। इस साल अधिमास में दो तिथियां कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी और शुक्ल पक्ष की तृतीया का क्षय है। श्राद्ध और नवरात्रि के बीच पूरे 1 महीने का अंतर रहेगा। श्राद्धपक्ष की सर्व पितृमोक्ष अमावस्या के अगले दिन नवरात्र शुरू हो जाता है, लेकिन नए साल में अमावस्या और नवरात्र के बीच पूरे 30 दिनों का अंतर होगा। अधिक मास होने के कारण शारदीय नवरात्र पितृपक्ष के एक माह बाद 17 अक्टूबर से शुरू होगा। इसके साथ ही दीपावली 14 नवंबर को होगी।