
अदालती आदेश में जाति लिखने पर एडवोकेट ने सीजेआई पत्र लिखकर जताया विरोध
जयपुर
(Court) कोर्ट में पेश होने वाले (affidavits) हलफनामों व अन्य दस्तावेजों सहित (cause title) कॉज टाईटल में याचिकाकर्ता की जाति लिखने के खिलाफ (Delhi) दिल्ली के एक (Advocate) एडवोकेट पाई अमित ने (Supreme court Of India) सुप्रीम कोर्ट के (CJI) मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है।
पत्र में कहा है कि कॉज टाईटल में जाति का उल्लेख करना बेहद निराशाजनक है क्यों कि हमारे संविधान और कानून में जाति का कोई स्थान नहीं है और यह समानता के अधिकार के विपरीत है। एडवोकेट पाई अमित का कहना है कि उनकी राय में अदालती कार्यवाही में जाति का उल्लेख करने का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। संप्रभू राष्ट्र की जनता की ओर से स्वयं को संविधान देने के 70 साल बाद भी जाति या धर्म का उल्लेख करने से साफ है कि समाज में आज भी पूर्वाग्रह गहरे तक बैठा हुआ है। पत्र में सीजेआई से इस संबंध में उचित कदम उठाने का आग्रह किया है। पाई ने पत्र के साथ राजस्थान हाईकोर्ट का शुक्रवार को जारी हुआ जमानत का आदेश भी भेजा है जिसके कॉज टाईटल में याचिकाकर्ता की जाति का उल्लेख किया गया है।
Published on:
25 Apr 2020 05:35 pm
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