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दो साल बाद खुली घोटाले की फाइल

जिलेभर के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के नाम पर प्रवेशित बच्चों को पुनर्भरण राशि की किस्त देने में शिक्षा अधिकारियों ने अपने चेहतों को बजट ही आवंटित कर दिया।

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Jai Narayan Purohit

Feb 15, 2016

जिलेभर के प्राइवेट स्कूलों में आरटीई के नाम पर प्रवेशित बच्चों को पुनर्भरण राशि की किस्त देने में शिक्षा अधिकारियों ने अपने चेहतों को बजट ही आवंटित कर दिया। नियम-कायदों की अनदेखी से बांटे गए इस बजट को लेकर शिक्षा निदेशालय ने तत्कालीन आठ बीईईओ को चार्जशीट दी गई थी, दो साल पहले हुए घोटाले की जांच करने की फाइलें अब खुली है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर के उपनिदेशक ओमप्रकाश सारस्वत और जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक बंशीलाल रोत ने यह जांच प्रक्रिया शुरू की है। डीईओ रोत ने बताया कि संबंधित अधिकारियों से लिखित जवाब लिया गया। इसमें अधिकांश ने अपना स्पष्टीकरण दिया भी है। पिछले साल प्रारंभिक शिक्षा चुरू, हनुमानगढ़, बीकानेर और शिक्षा निदेशालय जयपुर की संयुक्त टीम ने भी दुबारा जांच की थी। इस जांच में बड़े पैमाने पर आरटीई की पुनर्भरण राशि बांटने में अनियमितताएं बरतने का खुलासा किया गया था।
इन अधिकारियों की विभागीय जांच : शिक्षा निदेशालय ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक मुखविन्द्र सिंह, अनूपगढ़ के तत्कालीन बीईईओ शंकर धारीवाल, पदमपुर के राजवीर सिंह, घड़साना के सोहनलाल साहू, रायसिंहनगर के रणजीत सिंह, श्रीगंगानगर के जयसिंह रणवां, श्रीकरणपुर के जयप्रकाश शर्मा और सूरतगढ़ के पृथ्वीसिंह धांधल को जांच के दायरे में शामिल किया है। इन अधिकारियों को पदमपुर के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में तलब किया गया। इस दौरान उपनिदेशक सारस्वत
और डीईओ रोत ने उनका स्पष्टीकरण लिया।
यह था मामला
वर्ष 2012-13 के शिक्षा सत्र के दौरान आरटीई के तहत पुनर्भरण राशि की पहली किस्त देने में करीब दो करोड़ रुपए बजट वितरित किया गया था, उसमें अनियमितताएं बरती गई। इस कारण संबंधित स्कूलों को निर्धारित नियमों से अधिक भुगतान किया गया। छह हजार बच्चों को एडमिशन शिक्षा विभाग ने जिले में 869 प्राइवेट स्कूलों को आरटीई के दायरे में शामिल किया। इन स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले 5 हजार 953 बच्चों के नाम पर अधिकारियों ने पुनर्भरण की पहली किस्त के रूप में एक करोड़ 98 लाख 37 हजार रुपए का भुगतान कर दिया। लेकिन संभाग में सबसे अधिक बजट वितरण पर उच्चाधिकारियों ने संबंधित स्कूलों की जांच करवाई थी। भौतिक सत्यापन के बाद संबंधित स्कूलों में कई एडमिशन अपात्र माने गए। उच्चाधिकारियों की अलग-अलग टीमों ने रिकॉर्ड खंगाला तो बीईईओ और तत्कालीन शिक्षा अधिकारी को जांच के दायरे में शामिल कर लिया।
बदली नहीं सूरत
पिछले दिनों शिक्षा निदेशालय ने प्रारभिंक शिक्षा विभाग के अधीन जिले के 105 प्राइवेट स्कूलों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 69 प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में आरटीई के नाम पर गड़बड़ी करने की सूची में शामिल किया गया था। इस संबंध में राजस्थान पत्रिका के एक फरवरी के अंक में प्रकाशित समाचार श्रीगंगानगर जिले के 105 स्कूल चीटरÓ के बाद शिक्षा विभाग ने दुबारा टीमों का गठन कर जांच शुरू की है। अब तक की जांच में कई प्राइवेट स्कूलों में आरटीई एडमिशन के नाम पर की गई गड़बडि़यों की पुष्टि भी हुई है। हालांकि इस संबंध में अभी जांच विचाराधीन है।