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श्रीहरिकोटा से अग्निकुल कॉसमॉस करेगा अग्निबाण का प्रक्षेपण

स्काईरूट के अलावा चेन्नई आधारित एक अन्य अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से अपने पहले रॉकेट के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसी साल के अंत तक वे भी अपने पहले रॉकेट का प्रक्षेपण कर लेंगे।

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स्काईरूट के अलावा चेन्नई आधारित एक अन्य अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस भी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से अपने पहले रॉकेट के प्रक्षेपण की तैयारी कर रहा है। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक अगर सबकुछ ठीक रहा तो इसी साल के अंत तक वे भी अपने पहले रॉकेट का प्रक्षेपण कर लेंगे।

अग्निकुल को पहला फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम (एफटीएस) सौंपा
हाल में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने अग्निकुल को पहला फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम (एफटीएस) सौंपा था। नव गठित भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्रमाणीकरण केंद्र (इन-स्पेस) के सहयोग से इसरो निजी क्षेत्रों को तमाम सहायता पहुंचा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने यह महत्वपूर्ण प्रणाली कई दौर के बातचीत और इनके प्रयोग एवं हैंडलिंग के बारे चर्चा करने के बाद सौंपी। इसका उपयोग अग्निकुल कॉसमॉस अपने प्रक्षेपण यान 'अग्निबाणÓ में करेगा।

एफटीएस प्रणाली का प्रयोग
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने कहा कि एफटीएस प्रणाली का प्रयोग उसके अपने प्रक्षेपणयानों में होता है। पहली बार यह प्रणाली को निजी क्षेत्र की किसी अंतरिक्ष कंपनी को दी गई है। इसका उपयोग अग्निकुल के पहले उप-कक्षीय रॉकेट प्रक्षेपण में किया जाएगा। रॉकेट का प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से होगा।

प्रक्षेपण इसी साल के अंत तक किया जाएगा
अग्निकुल के सह संस्थापक श्रीनाथ रविचंद्रन के अनुसार प्रक्षेपण इसी साल के अंत तक किया जाएगा। इस संदर्भ में औपचारिक घोषणा जल्द की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसरो से प्राप्त एफटीएस प्रणाली रॉकेट के नियंत्रित और निर्देशित उड़ान के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण है। इस प्रणाली के बिना उड़ान संभव नहीं है।