भले ही आप कम पढ़े लिखे हैं लेकिन आप में कुछ अलग करने का जज्बा है तो यह खबर आपके लिए ही है। जोबनेर स्थित श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय एग्री एंटरप्रेन्योरशिप विकसित कर स्टार्टअप को बढ़ावा देने का काम कर रहा है। अब तक विवि की ओर से 107 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और देश भर के 34 स्टार्टअप्स को 4 करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान भी दिया जा चुका है। अब यह युवा एंटरप्रेन्योर बन कर अपना और दूसरों का भविष्य सुधार रहे हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना के तहत एग्रीकल्चर फील्ड में एंटरप्रेन्योरशिप को प्रोत्साहित करने के लिए वर्ष 2018-19 में कृषि विवि में एसकेएन एग्री बिजनेस इन्क्यूबेशन सेंटर साबी की शुरुआत की गई। इस सेंटर का उद्देश्य स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ आर्थिक सम्बल देना था। ना केवल राजस्थान बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के युवाओं ने स्टार्टअप के लिए अनुदान लिया है।
दो योजनाओं में 5 से 25 लाख रुपए तक का अनुदान
विश्वविद्यालय की ओर से स्टार्टअप के लिए दो योजनाओं अभ्युदय और कल्पवृक्ष के तहत 5 लाख से 25 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाता है। अभ्युदय योजना के तहत नवचारी विचार वाले व्यक्ति को दो माह की निशुल्क ट्रेनिंग और 5 लाख रुपए तक अनुदान दिया जाता है। वहीं कल्पवृक्ष के तहत जो स्टार्टअप पहले से चल रहे हैं उन्हें बढ़ावा देने के लिए दो माह निशुल्क प्रशिक्षण और 25 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाता है।
पहले प्रशिक्षण फिर अनुदान
ऐसे युवा को एग्रीकल्चर के क्षेत्र में कुछ नवाचार कर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, वह यहां आवेदन करते हैं, उन्हें एसकेएन एग्री इनक्यूबेशन सेंटर साबी में प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद उनके आईडिया पर चर्चा की जाती है। यदि आइडिया स्वीकार हो जाता है तो पहली किस्त के रूप में 40 फीसदी अनुदान दिया जाता है। इसके बाद दूसरी किस्त में 40 फीसदी और अंतिम किस्त में 20 फीसदी अनुदान दिया जाता है।
इन क्षेत्र में स्टार्टअप्स को किया जाता है प्रमोट
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इन एग्रीकल्चर, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन, ऑर्गेनिक फार्मिंग, एग्री वेस्ट टू वेल्थ, फार्म रिटेलिंग, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर बायो टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड फार्म मैकेनाइजेशन, फ्लोरीकल्चर एंड लैंड स्कैपिंग, सीड प्रोडक्शन, प्लांट प्रोटेक्शन, प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन्र क्रॉप मैनेजमेंट,, बायो एजेंट्स एंड बायो फर्टिलाइजर्स और ऑर्नामेंटल एक्यूकल्चर और एनिमल हसबैंड्री और सप्लाई चैन मैनेजमेंट।
किया जाता है भौतिक सत्यापन
इतना ही नहीं स्टार्टअप जो भी काम करते हैं उसका भौतिक सत्यापन भी किया जाता है। जिससे उनके काम की प्रगति के साथ उसकी आगे की स्थिति का भी पता चल सके। सेंटर की ओर से नियुक्त मेंटर काम की मॉनिटरिंग करते हैं। यदि कोई प्रगति नजर नहीं आती तो अनुदान वापस भी लिया जाता है।
इनका कहना है,
फार्मिंग में नवाचार के लिए केंद्र सरकार की ओर से राशि स्वीकृत की जाती है। अब तक हम चार करोड़ रुपए से अधिक का अनुदान दे चुके हैं। इसमें आयु की कोई बाध्यता नहीं है।
डॉ. अशोक कुमार गुप्ता
सीईओ, साबी, श्रीकर्ण नरेंद्र कृषि विवि, जोबनेर।