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मोहित शर्मा .
जयपुर. अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 (बोइंग 787-8) टेकऑफ के दो मिनट बाद मेघानीनगर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में 241 लोग मारे गए, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। केवल एक यात्री, विश्वस कुमार रमेश, जीवित बचा। इस त्रासदी ने भारत के विमानन सुरक्षा मानकों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो संजय गांधी से जनरल बिपिन रावत तक के हादसों की कड़ी में एक और अध्याय जोड़ता है। यह पहला मौका नहीं है जब भारत ने किसी बड़े नेता को विमान या हेलिकॉप्टर हादसे में खोया हो। अतीत में कई हादसों ने देश को झकझोर दिया है।
विजय रूपाणी 12 जून 2025
गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी अहमदाबाद के मेघानी नगर में टेक ऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान हादसे में मारे गए। इस हादसे की बड़े स्तर पर जांच की जा रही है।
संजय गांधी (1980): कांग्रेस के युवा नेता संजय गांधी की दिल्ली में एक निजी विमान हादसे में मृत्यु हुई, जब वे खुद विमान उड़ा रहे थे।
माधवराव सिंधिया (2001): उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक निजी विमान हादसे में उनकी मृत्यु हो गई।
वाई.एस. राजशेखर रेड्डी (2009): आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री की हेलिकॉप्टर हादसे में मृत्यु हुई।
दोरजी खांडू (2011): अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। पांच दिन बाद, 4 मई 2011 को, लुगुथांग के पास 13,500 फीट की ऊंचाई पर हेलिकॉप्टर का मलबा मिला। हादसे में खांडू सहित पांच लोगों की मृत्यु हुई।
जी.एम.सी. बालयोगी (2002): लोकसभा स्पीकर थे। निजी हेलिकॉप्टर से विशाखापट्टनम से हैदराबाद जा रहे थे। हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में बालयोगी सहित पांच लोगों की मृत्यु हुई।
जनरल बिपिन रावत (2021): भारत के पहले सीडीएस की हेलिकॉप्टर हादसे में मृत्यु ने सैन्य हेलिकॉप्टरों की सुरक्षा पर सवाल उठाए। जनरल बिपिन रावत के हेलीकॉप्टर हादसे में कुल 13 लोगों की मृत्यु हो गई थी। इसमें जनरल रावत के साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी शामिल थीं। यह हादसातमिलनाडु के कुन्नूर के पास हुआ था।
1966 में होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु: 1996 के चरखी दादरी हादसे में दो प्लेन टकराए जिसमें 349 लोगों की मौत हुई।
क्या हैं हादसों के कारणक्य? शुरुआती जांच में अहमदाबाद हादसे में लैंडिंग गियर की खराबी और कॉन्फिगरेशन एरर को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, पायलट त्रुटि, तकनीकी खराबी, और मौसम की मार (43 डिग्री सेल्सियस) ने हादसे को बढ़ावा दिया। अतीत के हादसों में भी यही कारक प्रमुख रहे हैं। बार-बार होने वाली इन त्रासदियों के बावजूद विमानन कंपनियों की लापरवाही सवालों के घेरे में है।
Updated on:
13 Jun 2025 02:53 pm
Published on:
13 Jun 2025 02:53 pm
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