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AI बन रहा तीसरा शख्स! पति-पत्नी के रिश्तों में घुसपैठ, आधे से ज्यादा लोग डर रहे – बिगड़ जाएंगे संबंध

AI Relationships: युवा सबसे ज्यादा चिंतित: AI की वजह से भावनात्मक बॉन्ड्स में दूरी बढ़ रही है- क्रिएटिविटी पर भी ग्रहण। लोग कहते हैं AI इंसानी सोच को कमजोर कर रहा है।

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जयपुर

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MOHIT SHARMA

Mar 22, 2026

AI in Relationships: जयपुर. आज की तेज़ रफ्तार वाली दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर जगह दखल दे रहा है। चैटबॉट्स से बातें, भावनात्मक सलाह, यहां तक कि रोमांटिक कंपेनियनशिप तक, लेकिन अब एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है: क्या AI पति-पत्नी या पार्टनर के बीच की नजदीकी को कमजोर कर रहा है? आधे से ज्यादा लोग डरते हैं कि AI की वजह से रिश्ते बिगड़ सकते हैं। लोग AI पर इतना निर्भर हो रहे हैं कि असली इंसानी बॉन्ड्स में दूरी बढ़ने लगी है – AI 'तीसरा व्यक्ति' बनकर रिश्तों में घुस आया है।

सर्वे लोग मानते हैं AI से मीनिंगफुल रिलेशनशिप्स कमजोर होंगी

प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Center) ने जून 2025 में 5,023 अमेरिकन एडल्ट्स पर सर्वे किया (रिपोर्ट सितंबर 2025 में जारी)। नतीजे चौंकाने वाले हैं 50% लोग मानते हैं कि AI लोगों की मीनिंगफुल रिलेशनशिप्स बनाने की क्षमता को खराब करेगा (worsen), जबकि सिर्फ 5% को लगता है कि ये बेहतर बनाएगा। बाकी 45% को कोई फर्क नहीं पड़ता या अनिश्चित हैं।53% लोग कहते हैं कि AI इंसानों की क्रिएटिव थिंकिंग को भी कमजोर करेगा।

युवाओं में डर और ज्यादा

युवाओं (30 साल से कम) में ये डर और ज्यादा है – 58% युवा मानते हैं कि AI से मीनिंगफुल रिलेशनशिप्स बिगड़ेंगी। कुल मिलाकर, आधे से ज्यादा अमेरिकन AI के बढ़ते इस्तेमाल से अधिक चिंतित हैं बजाय एक्साइटेड होने के।ये सर्वे दिखाता है कि AI रोजमर्रा की जिंदगी में घुस रहा है (62% लोग हफ्ते में कई बार AI से इंटरैक्ट करते हैं), लेकिन रिश्तों पर इसका नेगेटिव असर सबसे बड़ा डर है।

भावनाओं की जगह मशीनें ले रही

आज चैट GPT, Character.ai जैसे टूल्स से लोग इमोशनल सपोर्ट ले रहे हैं, ब्रेकअप मैसेज लिखवा रहे हैं, या AI 'पार्टनर' से बातें कर रहे हैं। इससे पति-पत्नी के बीच बातचीत कम हो रही है, विश्वास घट रहा है, और रिश्ते सतही बन रहे हैं। लोग चाहते हैं कि AI पर उनका कंट्रोल ज्यादा हो (60% से ज्यादा) ताकि ये जीवन और रिश्तों पर हावी न हो। लेकिन सवाल वही है – क्या टेक्नोलॉजी इंसानी भावनाओं की जगह ले सकती है? या ये सिर्फ एक टूल है जो इस्तेमाल पर निर्भर करता है?

भारत में भी ट्रेंड

ये ट्रेंड सिर्फ अमरीका तक ही नहीं – भारत में भी AI चैटबॉट्स, डेटिंग ऐप्स में यूज हो रहा है। समय है सोचने का AI मददगार बने या रिश्तों का दुश्मन?