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Research : सर्जरी से पहले ही रोगी के दर्द का अंदाजा लगा लेगा डीप लर्निंग पर आधारित एआइ मॉडल

रिसर्च : बेहतर इलाज की दिशा में क्रांतिकारी बदलाव के आसार (Research: Chances of revolutionary change towards better treatment)

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Research : सर्जरी से पहले ही रोगी के दर्द का अंदाजा लगा लेगा डीप लर्निंग पर आधारित एआइ मॉडल

Research : सर्जरी से पहले ही रोगी के दर्द का अंदाजा लगा लेगा डीप लर्निंग पर आधारित एआइ मॉडल

न्यूयॉर्क. शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) की मदद से ऐसी स्वचालित दर्द पहचान प्रणाली विकसित की है, जो सर्जरी से पहले, सर्जरी के दौरान और बाद में रोगियों के दर्द का सटीक आकलन करती है। यह प्रणाली कंप्यूटर विजन और डीप लर्निंग तकनीक आधारित है, ताकि विजुअल के जरिए दर्द का स्केल बताया जा सके।
अभी तक दर्द के स्तर का पता लगाने के लिए विजुअल एनालॉग स्केल (वीएएस) और क्रिटिकल केयर पेन ऑब्जर्वेशन टूल (सीपीओटी) जैसे तरीकों को आजमाया जाता है। इनमें एक्सपर्ट चेहरे की अभिव्यक्ति, शरीर की गति और मांसपेशियों में तनाव के आधार पर दर्द का मूल्यांकन किया जाता है।

बेहतर होगी देखभाल
कैलिफोर्निया के सैन डिएगो विश्वविद्यालय के मेडिकल छात्र और रिसर्च के लेखक टिमोथी हेन्ट्ज ने कहा, एआइ मॉडल से रोगी के दर्द का सही पता चलने से रोगी की देखभाल को और बेहतर बनाया जा सकता है। साथ ही अस्पताल में रहने की अवधि, दर्द, चिंता और अवसाद जैसी दीर्घकालिक स्वास्थ्य स्थितियों को रोका जा सकता है।

ऐसे किया शोध
शोधकर्ताओं ने एआइ मॉडल को चेहरों की एक लाख 43 हजार 293 छवियां दी। इनमें 115 दर्द वाले ऑपरेशन या सर्जरी थीं, इनमें जटिल हार्ट सर्जरी और हिप रिप्लेसमेंट के केस थे, जबकि 159 बिना दर्द वाले मामले थे। इसके बाद शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर को कुछ चेहरों की छवि दिखाकर दर्द का पैटर्न समझाया कि मुखाकृति कैसे दर्द में कैसे बदलती है। इसके बाद एआइ ने होठ, आंखें, चेहरे की बनावट और भावों को पहचानकर दर्द का सही मूल्यांकन किया। इसमें सीओपीटी परिणाम 88 फीसदी और वीएएस परिणाम 66 फीसदी रहा।

ये होगा फायदा
एआइ आधारित इस तकनीक को यदि मान्यता दी जाती है तो चिकित्सक इसका उपयोग रोगी की बेहतर देखभाल में कर सकते हैं। मसलन, दर्द का पता लगाने के लिए रिकवरी रूम में कैमरे लगाए जा सकते हैं। साथ ही नर्सेज भी रोगियों की पीड़ा का अंदाजा लगाकर इलाज में प्राथमिकता दे सकते हैं। इस एआइ टूल को अमरीका के सैन फ्रंासिस्को में चल रही एनेस्थिसियोलॉजी 2023 की वार्षिक बैठक में पेश किया गया।


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