3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एआई की आवाज और वीडियो क्लोनिंग से साइबर ठगी का खतरा, 2024 में साइबर फ्रॉड से 22,845 करोड़ का नुकसान

2025 के ट्रेंड्स और एक्सपर्ट प्रेडिक्शन्स पर आधारित प्रोजेक्शन हैं कि 2026 में एआई की आवाज और वीडियो क्लोनिंग से साइबर ठगी मामले और तेजी से बढ़ेंगे।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

MOHIT SHARMA

Dec 31, 2025

मोहित शर्मा.

जयपुर. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब साइबर अपराधियों का सबसे खतरनाक हथियार बन गया है। 2025 के अंत तक एआई डीपफेक और वॉइस क्लोनिंग से ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। 2025 के ट्रेंड्स और एक्सपर्ट प्रेडिक्शन्स पर आधारित प्रोजेक्शन हैं कि 2026 में ये मामले और तेजी से बढ़ेंगे।

ठग सोशल मीडिया से छोटी ऑडियो-वीडियो क्लिप्स लेकर परिवार के सदस्यों या सेलिब्रिटी की आवाज-चेहरा कॉपी कर लाखों-करोड़ों की ठगी कर रहे हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, लोकसभा में 22 जुलाई 2025 को दिए गए अनस्टार्ड क्वेश्चन नंबर 344 के जवाब में बताया गया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) के डेटा से 2024 में पूरे देश में साइबर फ्रॉड से नागरिकों को कुल 22,845.73 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। 2023 में यह राशि 7,465.18 करोड़ रुपए थी, यानी 206त्न की बढ़ोतरी।
2025 में ये आंकड़ा और बढऩे की आशंका है। हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में वॉइस क्लोनिंग से ठगी के सैकड़ों मामले सामने आए।

अमरीका की संघीय जांच एजेंसी FBI ने भी 2025 में चेतावनी जारी की कि ठग एआई से वॉइस-वीडियो क्लोन कर परिवार के सदस्यों या अधिकारियों का रूप धारण कर रहे हैं। FBI के अनुसार, अप्रेल 2025 से सीनियर अधिकारियों की नकल कर ठगी की जा रही है। ग्लोबल स्तर पर डीपफेक फ्रॉड से 2025 के पहले चार महीनों में ही 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ।

एआई से ठगी के प्रमुख तरीके

  • ठग मुख्य रूप से तीन तरीके अपनाते हैं पहला, वॉइस क्लोनिंग से फोन कर दुर्घटना या पुलिस केस बताकर पैसे मांगते हैं।
  • दूसरा, डीपफेक वीडियो से सेलिब्रिटी (जैसे एलन मस्क) बनकर फेक क्रिप्टो-शेयर इन्वेस्टमेंट प्रमोट करते हैं। 2025 में नोमानी इन्वेस्टमेंट स्कैम में एआई डीपफेक का इस्तेमाल 62 प्रतिशत बढ़ा।
  • तीसरा, रियल-टाइम डीपफेक से लाइव वीडियो कॉल पर चेहरा बदलकर बैंक अधिकारी या रिश्तेदार बन ठगते हैं। रोमांस स्कैम में भी एआई चैटबॉट और डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल बढ़ा है।

2026 में बढ़ेगा खतरा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2026 में ये खतरा और बढ़ेगा क्योंकि एआई टूल्स सस्ते और आसान हो गए हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्ट बताते हैं, " एआई स्कैम्स व्हॉट्सऐप, एसएमएस और फोन कॉल्स से फैल रहे हैं।"

बचाव के उपाय

  • अनजान कॉल पर पैसे न भेजें, दूसरे नंबर से वेरिफाई करें।
  • सोशल मीडिया पर आवाज-वीडियो कम शेयर करें।
  • 2 फैक्टर अथेन्टीकेशन ऑन रखें।
  • संदेह पर 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।

मुख्य खतरे

  • वॉइस क्लोनिंग: परिवार की आवाज कॉपी कर इमरजेंसी ठगी।
  • डीपफेक वीडियो: फेक क्रिप्टो-शेयर स्कीम।
  • रियल-टाइम डीपफेक: लाइव कॉल पर रिश्तेदार/अधिकारी बनकर धोखा।