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ग्रीन गोल्ड है अजोला

पशुओं में दुग्ध उत्पादन को बढ़ता है अजोला पशुपालकों की आमदनी बढ़ाने में सहायक

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जयपुर

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Suresh Yadav

Mar 02, 2020

ग्रीन गोल्ड है अजोला

ग्रीन गोल्ड है अजोला

जयपुर। बढ़ती जनसंख्या और घटते पशुधन का असर नजर आने लगा है। जिस गति से लगातार जनसंख्या बढ़ रही है उसी अनुपात में दूध की मांग भी दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। दूध की मांग को पूरा करने में अजोला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसकी खूबियों के कारण ही इसे ग्रीन गोल्ड भी कहा जाता है।
अजोला बुनियादी तौर पर पानी पर तैरने वाला एक फर्न है। इसका जैव उर्वरक व पशु आहार के रूप में उपयोग होता है। हम यह तो जानते हैं कि दुधारू पशुओं के पोषण तथा स्वास्थ्य के रखरखाव में हरा चारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

देश का दूध उत्पादन क्षेत्र हरे चारे पर निर्भर है। लेकिन यह भी सच है कि वर्तमान वातावरण में चारे की कमी बड़ी समस्या के रूप में सामने आ रही है। जनसंख्या बढऩे से चारा उत्पादन के लिए जमीन भी कम होती जा रही है। ऐसे में कम क्षेत्र में चारा उत्पादन की बढ़ाए जाने की जरूरत है।
अजोला में अन्य चारा घासों की तुलना में वार्षिक उत्पादन अधिक होता है। गाजीपुर जनपद के मुख्य चारा फसल बरसीम, बाजरा तथा लूसरी व चारी का वार्षिक उत्पादन 200 मीट्रिक टन प्रति हैक्टेयर से कम है, जबकि अजोला का वार्षिक उत्पादन 1000 मीट्रिक टन प्रति हैक्टेयर है।
अजोला में सभी आवश्यक पोषक तत्व पाए जाने के कारण गाय व भैसों की स्वास्थ्य वृद्धि व उत्पादन में यह सहायक है। यही नहीं किसान इसका उत्पादन आसानी से कर सकते हैं। शुद्ध प्रजाति का बीज उपयोग कर समय-समय पर कटाई करने से इसका अधिक उत्पादन प्राप्त होता है। भारत में पाई जाने वाली अजोला प्रजाति की लम्बाई 2 से 3 सेमी तथा चौड़ाई 1 से 2 सेमी होती है।
अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए इसकी कटाई 1 सेमी पर ही करनी चाहिए। पशुओं को चारा देने से पहले अजोला को अच्छी तरह से धोना चाहिए। क्योंकि गोबर से मिश्रित होने के कारण जानवर इसको पसंद नहीं करते।
अजोला उगाने के लिए नेशनल रिसोर्स डेवलपमेंट विधि हमारे यहां प्रयोग की जा रही है। इस विधि में प्लास्टिक शीट की मदद से 2 गुणा 2 गुणा 0.2 मीटर पानी रखने के लिए क्षेत्र बनाते हैं। इसमें 10 से 15 किलोग्राम उपजाऊ मिट्टी बिछाते हैं।
इस ट्रैंक को 2 किलोग्राम गाय के गोबर खाद व 30 ग्राम सुपर फॉस्फेट के मिश्रण से भर देते हैं। पुन: पानी डालकर जल स्तर 10 सेंटीमीटर तक पहुंचा देते हैं। लगभग एक किलोग्राम अजोला कल्चर इसमें डालते हैं।
तेज वृद्धि के कारण 10 से 15 दिनों में 500 से 600 ग्राम अजोला प्रतिदिन मिलना शुरू हो जाता है। फिर से इसमें 20 ग्राम सुपर फॉस्फेट प्रत्येक 5 दिन पर डालते हैं। इसके अलावा ऑयरन, कॉपर, सल्फर आदि मिलाना चाहिए। इस विधि द्वारा प्रति किलोग्राम अजोला चारा उत्पादन के लिए 63 पैसे से कम खर्च आता है।

अजोला का उपयोग जानवरों में दूध की मात्रा व वसा प्रतिशत बढ़ाने में किया जा रहा है, क्योंकि इसके उत्पादन में खर्च कम आता है। यही कारण है कि दिन प्रतिदिन इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। अजोला पोषण में दूध उत्पादन 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ता है। इसका प्रयोग 60 ग्राम तक करने पर 10 प्रतिशत तक सांद्र आहार घटाया जा सकता है। संकर नस्ल की गाय में 2 किग्रा सांद्र आहार की जगह 2 किग्रा अजोला खिलाते हैं तो दूध उत्पादन तथा श्रम दोनों मिलाकर लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक खर्च कम किया जा सकता है। अजोला को राशन के साथ 1 अनुपात 1 में सीधे पशुओं को दिया जा सकता है। इस तरह अगर हम देखें तो अजोला सही मात्रा में दुधारू पशुओं के दूध को बढ़ता है और कम खर्च में पशुपालकों की आमदनी को बढ़ाने मे ंसहायक है।


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