
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क दवा योजना के तहत संचालित मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा केन्द्रों के हालात अब कुछ सुधरने की उम्मीद जगी है। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (आरएमएससीएल) की नवनियुक्त प्रबंध निदेशक नेहा गिरि ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और अस्पतालों के चिकित्सा अधिकारियों को नि:शुल्क दवा केन्द्रों की मॉनिटरिंग कर मरीजों को सभी दवाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के संबंध में बुधवार को राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान (सीफू) में आयोजित राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दवाओं की अनुपलब्धता के संबंध में फार्मासिस्ट प्रत्येक दिन अपने संस्थान के चिकित्सा अधिकारियों को भी अवगत कराए। इससे चिकित्सक को मरीजों को दवा के अन्य विकल्प लिखने में मदद मिलेगी।
गिरी ने दवाइयां अनुपलब्ध होने की स्थिति में स्थानीय स्तर पर खरीदकर मरीज को दवा उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अस्पतालों में उपकरणों के रखरखाव को लेकर भी गंभीरता बरतने के निर्देश दिए। दरअसल, प्रदेश में वर्ष 2011 में तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार की ओर से शुरू की गई इस योजना को विश्व व्यापी सराहना मिली थी। नि:शुल्क दवा के इस मॉडल को देश के अन्य कई राज्यों ने अपनाया था। साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे बेहतरीन योजना बताया था। लेकिन धीरे-धीरे अन्य स्वास्थ्य योजनाएं आने के साथ ही इस योजना से सरकारों का फोकस हटने लगा। लेकिन सरकारी अस्पतालों के आउटडोर मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराने में यह योजना ही अभी भी कारगर है।
Published on:
21 Feb 2024 05:08 pm
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