
Aluminum के कोच बनेंगे, ट्रेनों के लिए साबित होंगे गेमचेंजर
नई दिल्ली. भारत में पहली बार ट्रेनों के कोच बनाने के लिए एल्युमीनियम का इस्तेमाल किया जाएगा। यह प्रयोग देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत के साथ किया जाएगा। फिलहाल इस ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 180 किलोमीटर प्रति घंटा है। एल्युमीनियम के कोच के बाद रफ्तार में करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आइसीएफ) के पूर्व जीएम और वंदे भारत के निर्माता सुधांशु मणि का कहना है कि एल्युमीनियम के कोच भारतीय रेल के लिए गेमचेंजर साबित होंगे।
अब तक देश में ट्रेनों का निर्माण स्टेनलैस स्टील से किया जाता है। इससे ये भारी रहती है। एल्युमीनियम का घनत्व स्टील से कम होता है। इससे ट्रेन को कम ऊर्जा में ज्यादा तेजी से दौड़ाया जा सकेगा। भारतीय रेलवे ऐसी 100 ट्रेन बनाने की तैयारी में है। इसके लिए निजी कंपनियों को ठेका दिया जाएगा। दो कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई है। इनमें से भारतीय कंपनी मेधा सर्वो ड्राइव्स स्विस कंपनी स्टेडलर के साथ मिलकर ट्रेन बनाएगी। दूसरी फ्रांस की कंपनी एल्सटोम है। यह पहले से दिल्ली मेट्रो के लिए कोच का निर्माण कर रही है। दोनों कंपनियों ने कॉन्ट्रेक्ट के लिए करीब 30,000 करोड़ रुपए की बोली लगाई है।
स्टील के मुकाबले ज्यादा होगी कोच की लागत
एल्युमीनियम के कोच बनाने का खर्च पहले से ज्यादा होगा। संभव है कि सारी ट्रेनें या इनमें से कुछ स्लीपर कोच के साथ बनाई जाएंगी। अभी वंदे भारत लंबी दूरी का सफर तय नहीं करती हैं। आने वाले समय में इन्हें लंबी दूरी के लिए चलाने की योजना है। इसके लिए स्लीपर कोच की जरूरत होगी। यूरोप में एल्युमीनियम कोच वाली ट्रेनें पहले से चल रही हैं। ये लंबी दूरी के सफर पर खरी उतरी हैं।
सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से पटना
दिल्ली-पटना राजधानी अपना सफर पूरा करने में करीब 13 घंटे लेती है। अन्य एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों का समय और ज्यादा है। नए मैटेरियल से बनी वंदे भारत दिल्ली से पटना पहुंचने में 6 घंटे से भी कम समय लेगी। रेलवे का लक्ष्य 2024 तक पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन पटरियों पर उतारने का है।
Published on:
01 Mar 2023 10:49 pm
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