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एंबुलेंस खुद ही बीमार… आपको क्या पहुंचाएगी अस्पताल

आपात स्थिति या गंभीर घायल का सहारा प्रदेश की 108 एंबुलेंस (ambulance) सेवा खुद ही बीमार हो चुकी है। पर्याप्त रखरखाव (maintanance) के अभाव में आए दिन किसी ना किसी एंबुलेंस का ब्रेक डाउन (break down) होता रहता है। इनकी दशा सुधारने की तरफ किसी का ध्यान नहीं, लेकिन खमियाजा मरीजों (patient) को भुगतना पड़ रहा है।
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एंबुलेंस खुद ही बीमार... आपको क्या पहुंचाएगी अस्पताल

एंबुलेंस खुद ही बीमार... आपको क्या पहुंचाएगी अस्पताल

आपात स्थिति या गंभीर घायल का सहारा प्रदेश की 108 एंबुलेंस सेवा खुद ही बीमार हो चुकी है। पर्याप्त रखरखाव के अभाव में आए दिन किसी ना किसी एंबुलेंस का ब्रेक डाउन होता रहता है। इनकी दशा सुधारने की तरफ किसी का ध्यान नहीं, लेकिन खमियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

राज्य सरकार ने 20 सितंबर, 2008 को एंबुलेंस सेवा शुरू की थी। हालांकि प्रदेश में 108, 104 व बेस एंबुलेंस की संख्या 1500 से ज्यादा है। इनमें से करीब 250 तो खराब पड़ी है। कई बार मरम्मत के बावजूद वे दोबारा खराब हो जाती है। इसके अलावा 200 एबुंलेंस एेसी हैं, जो कभी भी ब्रेक डाउन हो सकती है।

200 वाहनों का रिप्लेसमेंट अटका

एंबुलेंस की खराब स्थिति के चलते मरीजों को इन दिनों काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। उधर, एंबुलेंस पर कार्यरत कर्मचारी भी वाहनों की स्थिति सुधारने की मांग कर चुके हैं पर अभी तक उनकी मांगों की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। 200 वाहनों के रिप्लेसमेंट का मामला भी अभी पाइप लाइन में ही है।

खस्ताहाल...कछुआ चाल, उतारना पड़ा मरीज
दो दिन पूर्व चूरू में एक मरीज की तबीयत खराब होने पर एंबुलेंस उसे जयपुर लेकर आ रही थी। एंबुलेंस वाहन तकनीकी खराबी के चलते ज्यादा तेज गति से चल नहीं पा रहा था, एेसे में मरीज की तबीयत ज्यादा खराब हो गई और मरीज को जयपुर के बजाय सीकर के एक अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।

पुलिया नहीं चढ़ पाई एंबुलेंस
पिछले दिनों एक मरीज को सवाई मानसिंह अस्पताल ले जा रही 108 एंबुलेंस टोंक रोड पुलिया भी नहीं चढ़ पाई। पुलिया की आधी चढ़ाई करने के बाद ड्राइवर को उसे रोकना पड़ा। बाद में, दूसरी एंबुलेंस बुलाकर मरीज को अस्पताल भेजना पड़ा।

चिकित्सकीय उपकरण भी नहीं
मरीज को प्राथमिक उपचार देने से पहले शुगर जांच भी जरूरी होती है, लेकिन अधिकतर एंबुलेंस में ग्लूकोमीटर नहीं है। पल्स की जांच के लिए ऑक्सीमीटर, निबुलाइजर, सैक्शन मशीन तथा व्हीलचेयर तक नहीं हैं। इसके अलावा भी कई छोटी-मोटी खामियां एंबुलेंस में हैं।

बुरे हाल हैं वाहनों के
कई एंबुलेंस का बंपर टूटा हुआ है तो कुछ में मरीज के लिए लगाया गया पंखा खराब है। सीटें लगभग जवाब दे चुकी हैं। हाल यह है कि फाटक बंद करने में भी मशक्कत करनी पड़ती है। चालक व खलासी साइड के फाटक लॉक नहीं होते। इसके कारण कई बार बीच रास्ते में खुल जाने की आशंका बनी रहती है। बारिश के मौसम में विंडस्क्रीन वाइपर काम नहीं करता। हैडलाइट भी कमजोर है।


फैक्ट फाइल

1516 एंबुलेंस प्रदेश में चल रही हैं
730 है 108 एंबुलेंस की संख्या
576 है 104 एंबुलेंस की संख्या
200 है बेस एंबुलेंस की संख्या

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