
40 वर्षीय मार्क डिकी ने कहा, मुझे लगा था जीवित नहीं बचूंगा
अंकारा. तुर्की की मोर्का गुफा में फंसे अमरीकी रिसर्चर को 9 दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। 40 वर्षीय रिसर्चर मार्क डिके मैप बनाने के लिए तुर्की की तीसरी सबसे बड़ी गुफा में उतरे थे, लेकिन 2 सितंबर को अचानक तबीयत बिगडऩे के बाद वे 3400 फीट की गहराई पर फंस गए। गुफा का मुश्किल रास्ता, इस पर घुप अंधेरा, सीलन और चट्टानों से टपकते पानी के बीच जितना मुश्किल डिके का बच पाना था, उतनी ही चुनौतीपूर्ण ये रेस्क्यू ऑपरेशन था। लेकिन 6 देशों के 190 एक्सपर्ट की टीम ने बेहद कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम तक पहुंचाया। डिके को गुफा से निकालते ही तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। अभी वह कमजोर, लेकिन स्वस्थ हैं।
ऑपरेशन को छह भागों में बांटा
रेस्क्यू दल ने अमरीकी रिसर्चर डिके को बचाने के लिए गुफा के अंदर की मुश्किलें और तापमान को ध्यान में रखकर गुफा को छह स्तरों में बांटा। इसमें सबसे ऊपर तुर्की की टीम थी, इसके बाद हंगरी, पोलैंड, इटली, क्रोएशिया और सबसे नीचे बुल्गारिया की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई। करीब 13 हजार फीट गहरी गुफा में जहां डिके फंसे थे, वहां से बाहर आने में किसी स्वस्थ और अनुभवी व्यक्ति को 15 घंटे लगते हैं।
पानी, कीचड़ और संकरे रास्ते
बचावकर्मियों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल गुफा के आड़े रास्ते और खड़ी चट्टानों के बीच नेविगेट करना रहा। इस पर काफी कम तापमान, पानी और कीचड़ से मुश्किलें और बढ़ गई। दूसरी चुनौती, गुफा के कई संकरे रास्ते थे, जिनसे स्ट्रेचर के जरिए रस्सियों से खींचना संभव नहीं था। इसलिए पहले कई रास्तों को विस्फोट से तोडकऱ चौड़ा किया गया।
मुझे लगा, अब जिंदा नहीं बचूंगा
मार्क डिके ने रेस्क्यू टीम का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, मुझे लगने लगा था कि अब मैं गुफा से जिंदा बाहर नहीं निकल पाऊंगा। डिके के माता-पिता ने भी बचाव अभियान में शामिल देशों और टीम के सदस्यों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा, हमारा बेटा सुरक्षित बच गया, इससे ज्यादा हमें कुछ नहीं चाहिए।
Updated on:
13 Sept 2023 11:32 pm
Published on:
13 Sept 2023 11:29 pm
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