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Animal Husbandry Department- दो साल से पूर्णकालिक निदेशक नहीं

स्टेट के एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट के हाल बेहाल हैं। लंबे समय से कार्मिकों के काम अटके हुए साथ ही विभागीय योजनाओं का संचालन भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा। वजह है विभाग में पूर्णकालिक निदेशक का ना होना।

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Dec 28, 2021

Animal Husbandry Department- दो साल से पूर्णकालिक निदेशक नहीं

Animal Husbandry Department- दो साल से पूर्णकालिक निदेशक नहीं

बिना निदेशक चल रहा डिपार्टमेंट

दो साल से पूर्णकालिक निदेशक नहीं
पूर्व जेएस ने भी कर दिया था कार्यभार संभालने से इंकार

विभागीय काम काज हो रहा प्रभावित

Rakhi Hajela

जयपुर।

स्टेट के एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमेंट के हाल बेहाल हैं। लंबे समय से कार्मिकों के काम अटके हुए साथ ही विभागीय योजनाओं का संचालन भी सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा। वजह है विभाग में पूर्णकालिक निदेशक का ना होना। दरअसल विभाग एकमात्र ऐसा विभाग है जो पिछले दो साल से बिना पूर्णकालिक निदेशक के चल रहा है। निदेशक के पद के लिए डीपीसी भी अब तक नहीं हुई है लेकिन इसकी चिंता ना तो सरकार को है और ना ही विभागीय मंत्री को। निदेशक का पद रिक्त होने का असर सीधे तौर पर विभाग के कार्यों और योजनाओं पर पड़ रहा है।

जेएस ने चार्ज लेने से कर दिया था इंकार
गौरतलब है कि निदेशक का अतिरिक्त चार्ज संभाल रहे शासन उप सचिव डॉ.़ वीरेंद्र सिंह का तबादला अगस्त 2021 में कलेक्ट्रेट में हो गया। उनके जाने के बाद संयुक्त शासन सचिव के पद पर आए लक्ष्मीकांत बालोत को निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार देने के प्रयास किए गए लेकिन उन्होंने इससे साफ इंकार कर दिया और अब बालोत को कृषि विपणन मंत्री मुरारी लाल मीणा के पीएस की जिम्मेदारी सौंप दी गई है और वह भी विभाग से जा चुके हैं।

कोर्ट तक भी पहुंच चुका है मामला
सूत्रों के मुताबिक निदेशक के पद को लेकर उदासीनता पहली बार सामने नहीं आई है। दिसंबर 2019 के बाद से पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति नहीं की गई है। एक मई 2015 से 31 अक्टूबर 2018 तक डॉ. अजय कुमार गुप्ता को इस पद की जिम्मेदारी दी गई। इनके बाद डीपीसी के जरिए लक्ष्मण लाल राठौड़ को निदेशक की जिम्मेदारी दी गई जो आरएलडीबी के सीईओ की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे लेकिन मामला कोर्ट में चला गया। हाईकोर्ट ने स्टे लगाते हुए उनके निदेशक के अधिकार सीज कर दिए लेकिन राठौड़ एक नवंबर 2018 से 24 सितंबर 2019 तक निदेशक के पद पर बने रहे। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. शैलेश शर्मा 29 सितंबर 2019 से 31 दिसंबर तक निदेशक रहे।

नियमों के विपरित दी नियुक्ति
शैलेश शर्मा के बाद दो माह तक निदेशक का पद रिक्त रहा और शासन उप सचिव डॉ. वीरेंद्र सिंह को विभाग के निदेशक का अतिरिक्त चार्ज सौंपा गया। फरवरी 2020 से अगस्त 2021 तक डॉ. वीरेंद्र सिंह ने इस पद की जिम्मेदारी संभाली जो राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे, नियमों के तहत विभाग के निदेशक का पद विभाग के तकनीकी अधिकारी या किसी आईएएस को ही दिया जा सकता है लेकिन ऐसा नहीं किया गया। डॉ. वीरेंद्र सिंह के तबादले के बाद विभाग का कोई ढणी धोरी नहीं है। विभाग में पूर्व में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी यशुदेव शर्मा, पीसी सिंघवी, एके पांडेय,टीआर वर्मा, एसएन सिंह,ऐके सिंह निदेशक पद पर सेवाएं दे चुके हैं। काम हो रहे हैं प्रभावित

विभागीय कामकाज की हालत यह है कि अधिकारी विभाग के किसी काम या योजना की जिम्मेदारी खुद पर लेने को तैयार नहीं है। कार्मिकों को भी निदेशक के नहीं होने पर निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। ना शिकायतों का निपटारा हो पा रहा है ना ही विभाग में लंबित जांच प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। ना एसीपी के काम हो रहे हैं ना ही विभागीय इंक्रीमेट के काम।
चिकित्सक और कार्मिक कर रहे पूर्ण कालिक निदेशक की मांग

वहीं विभागीय चिकित्सक और कार्मिक लगातार विभाग में पूर्णकालिक निदेशक की नियुक्ति किए जाने की मांग कर रहे हैं। वेटरनेरियन एसोसिएशन के महासचिव डॉ. महेश यादव और पशु चिकित्सा कर्मचारी संघ के महामत्री अर्जुन शर्मा का कहना है कि पिछले दो साल से वह विभाग के मंत्री, मुख्य सचिव और शासन सचिव के समक्ष बार बार निदेशक की मांग कर रहे हैं लेकिन उनके प्रयास विफल हो रहे हैं।
इनका कहना हैए

पशुपालन विभाग की अवहेलना नहीं की जा रही है। यह सही है निदेशक का पद रिक्त चल रहा है उसकी वजह कुछ लिटिगेशन थीं जो अब दूर हो गई हैं। जल्द ही विभाग में पूर्ण कालिक निदेशक की नियुक्ति की जाएगी।
लालचंद कटारिया, पशुपालन मंत्री।