19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जयपुर

आज से पशुओं का इलाज भी होगा निशुल्क, टीकाकरण और रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं देना होगा शुल्क

पत्रिका ने उठाई थी पशुपालकों की आवाज इसके बाद सरकार ने की बजट में घोषणा

Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

Apr 01, 2023

जयपुर। प्रदेश के पशुपालकों को आज यानी एक अप्रेल से अपने पशुओं का इलाज करवाने के लिए सरकारी पशु चिकित्सालयों में ना उन्हें पर्ची कटवाने के लिए शुल्क देना होगा और ना ही टीकाकरण और अन्य जांच जैसे सोनोग्राफी या एक्सरे का शुल्क देने की जरूरत होगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में इसकी घोषणा थी जिसकी पालना में पशुपालन विभाग ने निर्देश जारी कर दिए हैं जिसके मुताबिक आज यानी एक अप्रेल से सभी प्रकार के टेस्ट और टीके जैसे एफएमडी, ब्रुसेला और पीपीआर आदि भी निशुल्क कर दिए हैं । पशुओं के इलाज के लिए जो रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जा रहा था वह भी समाप्त कर दिया गया है।

 

पत्रिका बना आवाज
गौरतलब है राजस्थान पत्रिका ने इसे लेकर पशुपालकों की आवाज उठाई थी। अपनी खबर इंसान को फ्री, पशुओं का ढाई गुना महंगा इलाज, बजट में ओपीडी आईपीडी निशुल्क करने की मांग में बताया गया था कि किस प्रकार मूक पशुओं का इलाज महंगा हो गया है। क्योंकि गत वर्ष प्रदेश के पशुपालन विभाग ने एक अप्रेल से पंजीकरण शुल्क सहित अन्य शुल्क बढ़ा दिया था। पंजीकरण शुल्क दो रुपए से बढ़ाकर पांच रुपए कर दिया गया था, टीके के दाम बढ़े, पहले जिस टीकाकरण परिसेवा शुल्क के केवल 50 पैसे लगते थे, उसे बढ़ाकर एक रुपया कर दिया गया था, जिस टीकाकरण परिसेवा शुल्क का एक रुपए लगता था, उसे बढ़ाकर दो रुपए कर दिया गया था और तो और छोटे पशु की मेजर सर्जरी पर 20 रुपए व बड़े जानवर की मेजर सर्जरी पर 50 रुपए पशुपालक दे रहे थे, पशुओं के एक्सरे व सोनोग्राफी करवाने पर 50 रुपए लिए जा रहे थे। अब बजट घोषणा में सब निशुल्क कर दिया गया था।

 

बजट में की सरकार ने घोषणा, आज से प्रभावी
खबर प्रकाशित होने के बाद सरकार ने अपने वर्तमान बजट में पशुओं के इलाज के लिए ओपीडी आईपीडी निशुल्क किए जाने की घोषणा की। गौरतलब है कि कांग्रेस सरकार ने अपने जन घोषणा पत्र में पशुओं के निशुल्क इलाज और निशुल्क दवा को जरूरी सुधारों के साथ व्यापक रूप से लागू करने की बात कही थी,लेकिन गत वर्ष अप्रेल में जबकि पशुपालन विभाग की शासन सचिव डॉ आरुषि मलिक थीं, उन्होंने इसे निशुल्क करने के स्थान पर ढाई गुणा कर दिया था, इसके बाद राजस्थान पत्रिका पशुपालकों की आवाज बना और उनकी मांग प्रमुखता से उठाई।