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Ankylosing Spondylitis: सौ में एक व्यक्ति जूझ रहा है ‘एंकिलॉजिंग स्‍पॉन्डिलाइटिस’ से

Ankylosing Spondylitis: जयपुर . नौजवानों में ‘Ankylosing Spondylitis: ’ नामक बीमारी लगातार बढ़ रही है। हर सौ में से एक व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है।

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Ankylosing Spondylitis

बढ़ती उम्र, बैठने का गलत तरीका, व्यायाम न करना, खराब जीवनशैली, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, अनियंत्रित डायबिटीज, थायरॉइड, बढ़ा हुआ यूरिक एसिड और कोलेस्ट्रॉल, स्पॉन्डिलाइटिस के प्रमुख कारण हैं।

Ankylosing Spondylitis: जयपुर . नौजवानों में ‘एंकिलॉजिंग स्‍पॉन्डिलाइटिस’ ( Ankylosing Spondylitis: ) नामक बीमारी लगातार बढ़ रही है। हर सौ में से एक व्यक्ति इस बीमारी से जूझ रहा है। यह बीमारी होने पर जहां तकलीफ होती है वहीं जीवन जीने के तरीके में भी बदलाव हा आजा है।

डॉक्टरों के अनुसार ‘एंकिलॉजिंग स्‍पॉन्डिलाइटिस’ (एएस) एक बदली न जा सकने वाली स्थिति है। यह शरीर की हड्डियों में दर्द, अकड़न और सूजन पैदा करने वाली ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक ताकतें गलती से शरीर पर ही हमला करती हैं।


यह बीमारी नौजवानों को विशेष रूप से प्रभावित करती हैं। 20-30 और 30-40 वर्ष के युवा, ज्यादातर इस बीमारी की चपेट में आते हैं। ‘एंकिलॉजिंग स्‍पॉन्डिलाइटिस’ (एएस) में रीढ़ की हड्डी जरूरत से ज्यादा बढ़ने के कारण सख्त हो जाती है। एएस बीमारी से पीड़ित मरीजों में HLA-B27 नाम की जीन पाई जाती है, जिसका ब्लड टेस्ट से पता लगाया जा सकता है।


इय बीमारी का न तो कोई वास्तविक कारण है और न ही इसका मतलब यह है कि जिस व्यक्ति के शरीर में यह जीन होगा, वह एएस से ही पीड़ित होगा। अगर इस बीमारी की कोई जांच और इलाज न कराया जाए तो यह स्थिति चलने-फिरने में परेशानी पैदा कर सकती है। बैठने का अंदाज और व्यक्ति की पर्सनैलिटी बिगड़ सकती है।

इस बीमारी में आदमी की गर्दन और रीढ़ की हड्डी इस कदर झुक जाती है कि उसे सिर ऊपर उठाकर सीधे देखने में तकलीफ होती है। इसे स्ट्रक्चरल डैमेज प्रोग्रेसेशन कहा जाता है। इस बीमारी के कुछ मरीजों को व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ता है।


कंसल्‍टेंट रूमेटोलॉजिस्ट डॉ. राहुल जैन ने बताया कि इस बीमारी से निपटने में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एएस से पीड़ित मरीज का पूरा ध्यान सिर्फ दर्द से राहत पाने पर रहता है। पेनकिलर्स और व्यायाम से स्थिति को सुधारने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है, लेकिन इसके इलाज के लिए प्रभावी विकल्प जैसे बायोलॉजिक्स अपनाए जाएं तो संरचानात्मक नुकसान की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।


डॉ. राहुल जैन ने बताया कि बीमारी की जांच और इलाज में देरी से मरीजों के व्हीलचेयर के भरोसे चलने की नौबत आ सकती है। इसलिए यह बहुत ही जरूरी है कि अगर कोई भी व्यक्ति ‘एंकिलॉजिंग स्‍पॉन्डिलाइटिस’ से पीड़ित है तो वह रूमेटेलॉजिस्ट से जल्दी से जल्दी मिले और अपने इलाज के प्रभावी विकल्पों की तलाश करे। डॉमेडिकल ट्रीटमेंट के अलावा प्रियजनों और सहयोगियों की मदद से मरीजों की जिंदगी सुधारने में मदद मिलेगी।