इन याचिकाओं में वर्ष 2013 की तीनों भर्तियों को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि टीएसपी क्षेत्र वाले आदिवासियों को पहले सामान्य श्रेणी, फिर अनुसूचित जनजाति व अंत में टीएसपी की श्रेणी का लाभ दिया जाएगा।
याचिकाओं में यह कहा था
संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को 30 बोनस अंक का लाभ देकर आयु सीमा में छूट दी जाए। पूरक परीक्षा के जरिए अकादमिक व प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण होने वालों के वास्तविक अंकों की गणना की जाए। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में बदलाव किया, जो गलत है। टीएसपी क्षेत्र के अभ्यर्थियों को उनके ही वर्ग में रखा जाए।
सरकार ने यह कहा
अतिरिक्त महाधिवक्ता जगमोहन सक्सेना व अतिरिक्त महाधिवक्ता श्याम आर्य ने राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया कि फरवरी 2013 में भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में ही अनुभवी अभ्यर्थियों को आयु सीमा में पांच साल की छूट देने का प्रावधान बता दिया था। भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। अकादमिक पाठ्यक्रम के लिए पूरक परीक्षा में न्यूनतम अंक ही जोडऩे का प्रावधान है।