
लाखों अपार्टमेंटवासियों होंगे और सुरक्षित, नवम्बर में लागू होगा अपार्टमेंट ऑनरशिप बिल
जयपुर। बहुमंजिला इमारतों (अपार्टमेंट) में रहने वाले लाखों लोगों की बेहतर सुविधाओं से जुड़ी उम्मीद पूरी होगी। राजस्थान में अपार्टमेंट कानून लागू होने की टाइमलाइन तय हो गई है। इसके तहत 15 नवम्बर तक अपार्टमेंट आॅनरशिप बिल के नियमों का प्रारूप तय होगा और संभवतया 30 नवम्बर तक इसे कानून के रूप में अमलीजामा पहना दिया जाएगा। नगरीय विकास विभाग के प्रमुख साचिव भास्कर ए. सांवत ने संबंधित अफसरों को इसे लागू करने के लिए टाइमलाइन तय कर दी है। इस मामले में बुधवार को बैठक हुई जिसमें बिल लागू नहीं हो पाने के कारण जाने और फिर हर काम की मियाद तय करते गए। नियमों के प्रारूप पर लोगों से आपत्ति-सुझाव मांगे जाएंगे। गौरतलब है राष्ट्रपति ने तीन महीने पहले ही बिल को स्वीकृति दे दी थी। इसके बावजूद इसे फाइलों में बंद कर दिया गया।
रेरा से जोड़कर भी देखा जाता रहा
बहुमंजिला इमारतों में आवास लेने वालों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान अपार्टमेंट आॅनरशिप बिल का प्रारूप तैयार किया गया। विधानसभा में पारित करने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा। जहां तीन माह पहले मंजूरी मिल गई। हालांकि, इससे पहले केन्द्र सरकार ने इस बिल की कई धाराओं पर आपत्ति जताई और इसकी व रेरा कानून (रियल एस्टेट रेग्यूलेटिरी एक्ट) की धाराओं में विरोधाभास व असंगत होना बताया। इसके देखते हुए नगरीय विकास विभाग ने इसमें संशोधन करने के लिए विधि विभाग के पास फाइल भेजी।
इनमें किया गया संशोधन
-धारा 3 (एन) में डीड आॅफ अपार्टमेंट... की जगह डीड आॅफ ट्रांसफर आॅफ अपार्टमेंट.. जोड़ा।
-अपाटमेंट आॅनरशिप बिल की धारा 6 11(1) व 11(2) रियल एस्टेट एक्ट, 2016 के तहत असंगत था, जिसे तर्क संगत बनाया गया।
-इसके अलावा केन्द्रीय मंत्री व शहरी विकास मंत्रालय के सुझाव के आधार पर कई धाराओं में संशोधन हुआ।
रेरा और अपार्टमेंट आॅनरशिप बिल में समानता भी
-12 मीटर से ऊंचे आवासीय, वाणिज्यिक के लिए उपयोग होने वाले भवन इस श्रेणी में आएंगे।
-बिल्डर को भूमि का मालिकाना हक देने के लिए भूमि की सब लीज अपार्टमेंट खरीदार के पक्ष में जारी करनी होगी। जमीन का संयुक्त रूप से मालिकाना हक मिलेगा।
-डीड ऑफ अपार्टमेंट के माध्यम से अपार्टमेंट के साथ ही कॉमन एरिया व विभिन्न सुविधाओं पर खरीदार के अधिकार स्पष्ट होंगे।
-पुराने अपार्टमेंट्स के मामले में कानून लागू होने के साल भर के अंदर बिल्डर को अपार्टमेंट खरीदार से डीड संपादित करनी होगी।
-कानून लागू होने के बाद बनने वाले अपार्टमेंट्स में आवंटन के 6 महीने के भीतर बिल्डर को डीड संपादित करनी होगी।
-बुकिंग के समय बिल्डर और खरीदार के बीच एग्रीमेंट होगा। अपार्टमेंट निर्माण और कब्जे की समयावधि बतानी होगी।
-कब्जे में देरी पर बिल्डर पर जुर्माने का उल्लेख भी एग्रीमेंट में होगा। समय पर राशि नहीं देने पर खरीदार पर जुर्माना लगेगा।
-अपार्टमेंट निवासियों की एसोसिएशन बनेगी। बिल्डर नक्शे, वायरिंग-प्लम्बिंग की जानकारी देगा।
-अपार्टमेंट की डीड को एक्जीक्यूट कराने की भी जिम्मेदारी बिल्डर की होगी।
-इंडेक्स ऑफ रजिस्ट्रार के नियमों के तहत डीड कराने के लिए बिल्डर पाबंद।
3 सरकारें लागू नहीं कर पाई बिल
सरकार शहरों के वर्टीकल ग्रोथ को जरूरी मानती रही लेकिन अपार्टमेंट ओनरशिप बिल लागू करने से कतराती भी रही। वर्ष 2003 से 2008 तक बिल को लटाया गया। 22 दिसंबर 2008 को केंद्र को भेजा तो केंद्र ने यह कहकर लौटा दिया कि अगली सरकार के समय लागू किया जाए। पिछली कांग्रेस सरकार ने 2013 तक दोबारा संशोधन के साथ बिल बनाया, लेकिन उसको केंद्र ने संशोधन का हवाला देकर दो बार लौटाया। रेरा एक्ट लागू होने पर पिछली भाजपा सरकार ने फिर छह संशोधन किए और दोबारा संशोधित बिल 8 अप्रैल 2015 को विधानसभा में पास कराया। इसके बाद केंद्र ने पहले आपत्तियां की और दो बार संशोधन करवाए। राष्ट्रपति के पास भी बिल लौटा।
Published on:
30 Oct 2019 05:50 pm
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