
Marwar Horse Show will be started from February 1 in jodhpur
जयपुर
राजस्थान के मारवाड़ी घोड़े अरबी नस्ल के घोड़ों को टक्कर दे रहे हैं। पुष्कर मेले में इन मारवाड़ी घोड़ों की मांग हैं। इन घोड़ों की मेले में कीमत एक लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक है। वहीं इन घोड़ों को लेकर खरीददारों में खासा उत्साह है। प्रदेश के राजस्थानी मारवाड़ी घोड़ों की मांग राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के अन्य जिलों में भी हैं। इस बार पुष्कर मेले मे करीब 3500 घोड़े पहुंचे है। जिसमें से सबसे ज्यादा मारवाड़ी नस्ल के घोड़े है। पशुपालक बताते है कि राजस्थान के मारवाड़ी घोड़ों की खरीददार बहुत मांग करते हैं। यही कारण है सबसे ज्यादा पशुपालक अपने घोड़ों को बेचने के लिए पुष्कर मेले में लेकर आते हैं।
यह है मारवाड़ी घोड़ों की खासियत
राजस्थान के मारवाड़ी घोड़े अरबी नस्ल के घोड़ों का मुकाबला करते है। देखने में सुंदर दिखने वाले इन मारवाड़ी घाेड़ाें की कदकाठी और स्टेमिना इनकी खास बात हैं। पशुपालक बताते है कि मारवाड़ी और काठियावाड़ी घाेड़े की शुद्ध नस्ल मानी जाती है। वहीं अन्य जो भी ब्रीड है उसे घाेड़े की शुद्ध नस्ल नहीं कहा जा सकता है क्योकि अधिकत्तर नस्लें क्रॉसब्रीड होती है। अरबी घाेड़ाें का स्टेमिना उनकी खास बात हैं। यही खास बात मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों में भी है। पशु विशेषज्ञों की माने तो मारवाड़ी और काठियावाड़ी शुद्ध नस्ल के घाेड़े हैं। यह घोड़े सुंदर भी होते है और इनकी कदकाठी ही इनकी पहचान होती है। इसके अलावा इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता भी जबरदस्त होती है इसलिए इनमें किसी भी तरह का रोग लगने की संभावना कम होती है। खास बात यह है कि यह सर्दी गर्मी में बीमार भी कम होते है।वहीं रेसिंग में जिस तरह से अरबी घोड़े का प्रयोग किया जाता है उसी तरह से इन घोड़ों का भी प्रयोग लंबी रेस में किया जाता है। यही कारण है कि इन घोड़ों की मांग अधिक होती हैं।
चेतक भी था मारवाड़ी नस्ल का
महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा भी मारवाड़ी नस्ल का ही बताया जाता है। इतिहास के तथ्यों के आधार पर महाराणा प्रताप का चेतक घोड़ा मारवाड़ी नस्ल का ही था। वहीं सेना,पुलिस भी इसी नस्ल के घोड़ों का प्रयोग करती हैं। यही कारण है कि चेतक की खासियत की चर्चा आज तक होती है। चेतक की तरह ही मारवाड़ी नस्ल के घोड़ों की कठ काठी और स्टेमिना ही इनकी पहचान है। साथ ही इनके समझने की शक्ति भी इनकी खास पहचान है। हालांकि इन घोड़ों की संख्या में अब कमी आने लगी है। क्योकि इनकी खुराक अच्छी होती है ऐसे में पशुपालक पालन-पाेषण पर महंगाई के कारण ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन पंजाब और हरियाणा में आज भी इन घोड़ों की खास डिमांड है क्योकि वहां पर पशुपालक के लिए बेहतरीन संसाधन उपलब्ध होने के कारण वह इनका पालन पोषण ठीक से कर लेता हैं।
पुष्कर मेले में आज घोड़ों की प्रतियोगिता
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डाॅ. अजय अराेड़ा के अनुसार आज पुष्कर मेले में घोड़ों की प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा हैं। इसमें मेला मैदान में इन घोड़ों के लिए रिंग बनाई गई है जहां पर घोड़ों की खासियत पशुपालक दिखाएंगे। इसमें घोड़े की सुंदरता सहित अन्य बिंदूओं को देखकर ज्यूरी मेंबर बेस्ट हॉर्स का चुनाव कर उसे पुरस्कार देंगे।
Published on:
11 Nov 2019 10:11 am
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