
Aravallis Mining : जयपुर में रैमेन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जल संरक्षण विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह व अन्य। फोटो पत्रिका
Aravallis Mining : अरावली में खनन को लेकर लड़ाई तेज होती दिख रही है। पर्यावरणविद, कानून विशेषज्ञ और भूगर्भ वैज्ञानिक ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गठित कमेटी पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि अरावली जैसी संवेदनशील पर्वतमाला का भविष्य विशेषज्ञ नहीं, बल्कि कनिष्ठ अधिकारी तय कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर खनन पर रोक नहीं लगी तो राजस्थान का पेयजल बैंक खत्म होगा, बारिश का संतुलन बिगड़ेगा, नदियां सूखेंगी और थार का रेगिस्तान तेजी से फैलने लगेगा। विशेषज्ञों ने साफ कहा कि अरावली बचाने की लड़ाई अब कोर्ट से लेकर जनआंदोलन तक हर मोर्चे पर लड़ी जाएगी।
राष्ट्रीय जल बिरादरी के बैनर तले शनिवार को जयपुर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में रैमेन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जल संरक्षण विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह, राजस्थान के पूर्व महाधिवक्ता गिरधारी सिंह बापना और भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. के.एल. श्रीवास्तव ने कहा कि अरावली में खनन रोकने के लिए वे इससे प्रभावित लोगों के साथ लड़ाई जारी रखेंगे।
पूर्व महाधिवक्ता गिरधारी सिंह बापना ने बताया कि उन्होंने अरावली की नई परिभाषा को लेकर आपत्तियां कमेटी को भेज दी हैं। अरावली को केवल खनन योग्य संसाधन मानना गंभीर भूल होगी। संगमरमर, ग्रेनाइट और अन्य सजावटी पत्थरों के खनन से समाज को सीमित आर्थिक लाभ मिलता है, लेकिन इसके बदले पर्यावरण को होने वाली स्थायी क्षति की भरपाई संभव नहीं है। कुछ खदान मालिकों के व्यावसायिक हितों को जनहित और पर्यावरण से ऊपर नहीं रखा जा सकता।
राजेंद्र सिंह ने कहा कि अरावली केवल पर्वतमाला नहीं, बल्कि जलवायु तंत्र की रीढ़ है। यह वर्षा के स्वरूप और वितरण को प्रभावित करती है। यदि अरावली का क्षरण जारी रहा तो राजस्थान में बारिश और कम हो सकती है। साथ ही अरावली से निकलने वाली अनेक नदियों के जलग्रहण क्षेत्र भी प्रभावित होंगे, जिससे नदियों के सूखने और समाप्त होने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। कमेटी को लिखित सुझाव भेज दिए हैं।
इसके साथ ही पहाड़ों के संरक्षण के लिए अलग कानून बनाने का ड्राफ्ट भी सौंपा है। द इंडियन माउंटेन्स प्रिज़र्वेशन, कंज़र्वेशन एंड प्रोटेक्शन एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण, संवर्धन, सुरक्षा और सतत प्रबंधन के लिए, पर्वतों को महत्वपूर्ण पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संपत्ति के रूप में मान्यता देने की जरूरत है।
भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. के.एल. श्रीवास्तव ने कहा कि अरावली खनन के लिए नहीं, बल्कि राजस्थान का पेयजल बैंक है। यही पर्वतमाला थार के रेगिस्तान के विस्तार को रोकने का काम कर रही है। यदि इसे बचाया नहीं गया तो इसका असर केवल पर्यावरण ही नहीं, बल्कि प्रदेश के जल, खेती और भविष्य पर भी पड़ेगा।
Updated on:
08 Aug 2026 06:16 pm
Published on:
08 Aug 2026 06:16 pm
