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मिलिए राजस्थान को कई बार गौरव दिला चुकीं तीरंदाज़ स्वाति दुधवाल से, एक्स्ट्राज़ में खड़े होने की वजह से छोड़ दिया था वॉलीबॉल

राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली तीरंदाज़ स्वाति दुधवाल ने बहुत कम उम्र में अपने प्तिभा और उपलब्धियों के दम पर अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।

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जयपुर

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Rajesh

Nov 07, 2017

swati dhudhwal


राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली तीरंदाज़ स्वाति दुधवाल ने बहुत कम उम्र में अपने प्तिभा और उपलब्धियों के दम पर अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने 6ठी से 12वीं कक्षा तक वॉलीबॉल खेला। वे जूनियर, सब-जूनियर और सीनियर नेशनल में वॉलीबॉल टीम का हिस्सा भी रहीं। यहां तक कि जयपुर के महारानी कॉलेज में उनका एडमिशन वॉलीबॉल खिलाड़ी होने के आधार पर ही हुआ था, लेकिन उनके करियर में ऐसे-ऐसे मोड़ आए कि उन्हें तीरंदाज़ी खेल को ही चुनना पड़ा। विश्व यूनिवर्सिटी तीरंदाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना उनकी बड़ी उपलब्धियों में से एक है।

पत्रिका डॉट कॉम से ख़ास बातचीत में स्वाति दुधवाल ने अपने जीवन और करियर से जुड़े कई बातें शेयर की।

अपना अगला निशाना 2018 में होने वाले एशियाई गेम्स को बताते हुए स्वाति ने बताया कि कैसे उन्हें रोज़ घंटो तक परिश्रण करके वे अपने टारगेट के और करीब पहुँचने की कोशिश कर रहीं हैं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि चाहे कोई भी गेम हो मेहनत तो सभी में करनी होती है, लेकिन अगर आपको खुदको साबित करना है तो थोड़ी एक्स्ट्रा मेहनत ज़रूरी है। स्वाति ने बताया कि वे हर रोज़ 8-10 घंटे प्रैक्टिस करती है, किसी भी गेम को जीतने के लिए कॉन्फिडेंस और कंसंट्रेशन लेवल हाई होना चाहिए। तभी उस गेम को सही से समझ के अपना अच्छा प्रदर्शन दिखा सकते हैं।


...ऐसे चुना तीरंदाज़ी खेल
तीरंदाज़ी खेल चुनने के सवाल पर स्वाति ने बताया कि ये इंडिविजुअल गेम है और उनके पापा शुरू से ही इंडिविजुअल गेम चुनने को कहते थे। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद तीरंदाज़ी खेलना शुरू किया, इस दौरान उनकी फैमिली ने भी पूरा सपोर्ट किया।

युवा पीढ़ी में बढ़ रही है तीरंदाज़ी की रूचि

तीरंदाज़ी खेल में युवा पीढ़ी की रूचि के सवाल पर उन्होंने बताया कि जब उन्होंने शुरुआत की थी तब वे कम्पाउंड कैटेगरी की अकेली लड़की थीं जो कि स्टेट्स खेलने जाती थीं। लेकिन अब जब वे कोई भी चैम्पियनशिप खेलने जातीं है तो अपने साथ 20-25 लड़कियों को खड़ा देखती हैं। इससे यही साबित होता की युवा वर्ग इस खेल के प्रति काफी दिलचस्पी ले रहा है।


... और छोड़ दिया वॉलीबॉल

स्वाति पहले अपना करियर वॉलीबॉल खिलाडी के तौर पर बनाना चाहती थी। काफी वॉलीबॉल खेली भी लेकिन जब भी उन्हें एक्स्ट्राज़ में रखा जाता उन्हें अच्छा नहीं लगता था। स्वाति बताती हैं कि वॉलीबाल में एक्स्ट्राज़ में खड़े होना आत्मविश्वास को ठेस पहुंचाता है। लिहाज़ा वॉलीबॉल हमेशा के लिए छोड़ने का मन बना लिया। फिर अपने मेहनत के बलबूते उन्होंने एक के बाद एक कई अवार्ड्स जीते।

जैसा की हमारी सहयोगी अदिति यादव को बताया