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ज़िन्दगी से जंग लड़ रहा हिंदुस्तान का ‘अर्जुन’ लिम्बा राम, एम्स में चल रहा उपचार

ज़िन्दगी से जंग लड़ रहा हिंदुस्तान का 'अर्जुन' Limba Ram, AIIMS में चल रहा उपचार

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जयपुर।

देश का नाम कई बार रोशन करने वाले 'लेजेंड्री' तीरंदाज़ अर्जुन अवार्डी पद्मश्री लिम्बाराम इन दिनों न्यूरो डिजनरेटिव कंडीशन की गंभीर अवस्था से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य में लगातार गिरावट के चलते राजस्थान का ये 'अर्जुन' इन दिनों दिल्ली के एम्स में भर्ती है। फिलहाल उनकी स्थिति पर वरिष्ठ चिकित्सक निगरानी बनाये हुए हैं। इधर, स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया (साई) के अधिकारियों ने अस्पताल जाकर उनसे मुलाक़ात की और उन्हें इलाज के लिए आर्थिक मदद के तौर पर पांच लाख रूपए जारी करने को लेकर आश्वस्त किया।


स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ़ इंडिया ने एक ट्ववीट करते हुए लिखा है, ''लिम्बा राम भारतीय खेल का एक चैंपियन है और उनकी रिकवरी को लेकर चिंतित हैं। साई के अधिकारियों ने उससे मुलाकात की और उनके आगे के इलाज के लिए 5 लाख रुपये जारी किए जाएंगे।"

... इधर राज्यवर्धन ने भी की कामना

खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी एम्स में भर्ती लिम्बा राम के स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। राठौड़ ने अपने ट्वीट में लिखा, ''मेरी प्रार्थनाएं पद्म श्री लिम्बा राम जी और उनके परिवार के साथ हैं। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।''

जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भी रहे थे भर्ती

दरअसल, लिम्बा राम के स्वास्थय में गिरावट काफी समय से है। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में भी इलाज हो चुका है। वहां न्यूरो एक्सपर्ट डॉक्टर देबाशीष ने उनकी स्वास्थ्य जांच की थी। डायग्नोज़ के दौरान ही इस गंभीर बीमारी का पता चला। इसके बाद माइग्रेन का इलाज भी करवाया गया। इसके बाद उन्होंने स्वस्थ्य उपचार लिया। लेकिन फिर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ गया। बार-बार इलाज के बाद भी न्यूरो डिजनरेटिव बीमारी से ग्रसित ये 46 साल के पूर्व खिलाड़ी पूरी तरह से फिट नहीं हो पाया।

ये होने लगी थी दिक्कत
लिम्बाराम को सबसे पहले बातचीत करने और चलने फिरने में दिक्कतें महसूस होने लगीं थी। साथ ही मांसपेशियों में जकड़न भी रहती थी। इन परेशानियों के बाद जब उन्होंने जांचें करवाई तो न्यूरो सम्बन्धी बीमारी का पता चला।

सोशल मीडिया में भी चला कैम्पेन
लिम्बाराम के गिरते स्वास्थ्य को लेकर सोशल मीडिया पर भी कैम्पेन चला था। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के बैनर तले उनके शुभचिंतकों ने उनके इलाज में आर्थिक मदद किये जाने की अपील की थी। उनके एक मित्र ने फेसबुक पर एक पोस्ट डालते हुए लिखा था कि लिम्बाराम सीरियस मेडिकल इमरजेंसी से गुजर रहे है और उनको आर्थिक मदद की सख्त जरूरत है।

इसलिए लिम्बाराम हैं लिविंग लेजेंड
उदयपुर ज़िले के एक छोटे से सरादित गाँव में जन्में लिम्बा राम भारत के पहले तीरंदाज़ हैं, जिन्होंने विश्व स्तर पर तीरंदाज़ी के क्षेत्र में सफलता प्राप्त की। उन्होंने 1992 के एशियाई चैंपियनशिप मुक़ाबले में विश्व रिकार्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता था। वर्ष 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में लिम्बाराम मात्र एक अंक से पदक पाने से चूक गए थे। उन्हें 1991 में भारत के प्रतिष्ठित अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया था।


जंगलों में गुज़रा बचपन
लिम्बाराम का बचपन में उदयपुर के जंगलों हज़रा। वो वहां पर शिकार किया करते थे। उनको तीरंदाजी की कला में निपुणता दिलाने का श्रेय स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया को है, जिसने ‘स्पेशल एरिया मेमन प्रोग्राम’ के अन्तर्गत उन्हें प्रशिक्षण दिलवाया था।

राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी
लिम्बाराम का चयन तीन अन्य तीरंदाज़ों के साथ हुआ था। उसी साल लिम्बाराम ने सीनियर राष्ट्रीय तीरंदाज़ी चैंपियनशिप में 50 मीटर तथा 30 मीटर वर्ग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाकर विजय हासिल की थी। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी योग्यता साबित करने के बाद लिम्बाराम ने अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी क़ाबिलियत सिद्ध की। उन्होंने 1992 के बीजिंग एशियाई खेलों में 30 मीटर वर्ग में विश्व रिकॉर्ड बना डाला और स्वर्ण पदक जीत लिया।

ऐसे रहा उपलब्धियों का सफर

1. लिम्बा राम तीन बार ओलंपिक खेलों में भाग ले चुके हैं।
2. 1992 के बीजिंग एशियाई खेलों में उन्होंने विश्व रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीता था।
3. वह तीरंदाज़ी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर सफलता पाने वाले प्रथम भारतीय तीरंदाज़ हैं।
4. लिम्बा राम को 1991 में ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया था।
5. उन्होंने दो बार एशियाई खेलों में तथा दो बार विश्व कप मुकाबलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। इसके अतिरिक्त अन्य कई अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की ओर से भाग लिया है।
6. वे 1987 में केवल छह माह के अभ्यास के पश्चात् बंगलौर में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जूनियर चैंपियन बने थे।
7. वर्ष 1987 में ही वे सीनियर वर्ग में दिल्ली में खेलों में शामिल हुए और 30 मीटर में 2 स्वर्ण पदक हासिल किए तथा 70 मीटर में एक रजत व ओवरऑल में एक कांस्य पदक हासिल किया।
8. 1988 में लिम्बा राम ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए अमरावती में चार स्वर्ण पदक जीते और ओवरऑल राष्ट्रीय चैंपियन तथा उस प्रतियोगिता के सर्वश्रेष्ठ तीरंदाज़ घोषित किए गए। फिर उन्हें सियोल ओलंपिक के लिए चुन लिया गया।
9. 1989 में बीजिंग एशिया कप में लिम्बा राम के नेतृत्व में टीम ने कोरिया को हरा कर स्वर्ण पदक जीता।
10. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 1991 में कलकत्ता में ओवरऑल चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता।
11. 1992 में जमशेदपुर में ओवरऑल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
12. 1994 में गुड़गांव में 3 स्वर्ण, 1 रजत व 1 कांस्य जीतने में सफल रहे।
13. लिम्बा राम ने 1996 में कलकत्ता में 2 स्वर्ण तथा 2 रजत पदक जीते।
14. 1997 में उन्होंने जमशेदपुर में टीम तथा व्यक्तिगत मुकाबले में स्वर्ण हासिल किया।
15. वर्ष 2001 में लिम्बा राम ने अमरावती में स्वर्ण पदक जीते।
16. 1994 के पुणे खेलों में लिम्बा राम ने 4 स्वर्ण व 2 कांस्य पदक जीते।
17. 1988 में लिम्बा राम ने मॉस्को में स्प्रिंग एरो चैंपियनशिप में भारतीय टीम को कांस्य पदक जिताया।
18. 1989 में सुखूमी, जॉर्जिया में कांस्य पदक जीता।
19. 1992 में मॉस्को में कांस्य पदक जीता।
20. 1990 में फेडरेशन कप दिल्ली में टीम का स्वर्ण पदक जीता।
21. 1991 में फेडरेशन कप कोलकाता में उन्होंने टीम के लिये तथा व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते।
22. 1993 के फेडरेशन कप कोलकाता में टीम का स्वर्ण व व्यक्तिगत कांस्य पदक जीता।
23. 1995 में लिम्बा राम ने फेडरेशन कप, नई दिल्ली में, स्वर्ण तथा टीम का रजत पदक जीता।
24. 1990 में 3 देशों की अन्तरराष्ट्रीय मीट में बीजिंग व बैंकाक के साथ प्रतियोगिता में टीम का स्वर्ण पदक जीता।
25. 1993 में बैंकाक अन्तरराष्ट्रीय मीट में टीम का स्वर्ण तथा व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीते।