
दूसरे विश्व युद्ध के लड़ाकू विमानों के अवशेषों का म्यूजियम
ईटानगर. अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खंडू ने राज्य के पासीघाट में दूसरे विश्व युद्ध में काम आए अमरीकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों के अवशेषों को समर्पित एक म्यूजियम खोलने की घोषणा की है। म्यूजियम को वायुयान मार्गहम्प (एचयूएमपी) का नाम दिया गया हैं। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अमरीका ने हिमालय के ऊपर से चीन की सेना को सैन्य सामाग्री की आपूर्ति की थी। इस हवाई रास्ते को हम्प कहते हैं।
इस दौरान इस दुर्गम हिमालयन वायु मार्ग में कई अमरीकी विमान क्रैश हो गए थे। बाद में स्थानीय लोगों को विमानों के कई अवशेष मिले उनमें से कई सरकार के पास हैं। लेकिन न तो सभी प्राप्त अवशेष एक जगह पर रखे गए हैं और न ही सभी को खोजा जा सका। अब सरकार सभी अवशेषों को एक जगह रखने की योजना के तहत इस एचयूएमपी म्यूजियम की स्थापना करेगी। म्यूजियम के उद्घाटन समारोह में भारत में अमरीकी राजदूत शिरकत करेंगे।
2013 से चल रहा है तलाशी अभियान
अब तक 20 विमानों के पहचान की गई है और कुछ विमान चालकों के बचे हुए अवशेषों को उनके संबंधियों या परिवारों को भेजा गया हैं। अमरीका और भारत की सरकारी एजेंसियां के द्वारा अरुणाचल प्रदेश में 2013 से दूसरे विश्व युद्धकालीन विमान और चालकों के अवशेषों की तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
सरकार और उल्फा-एनडीएफबी संगठनों में जल्द शांति संधि
गुवाहाटी. सरकार असम के यूनाइटेड लिब्रेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) और नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट बोडोलैंड (एनडीएफबी) से शांति समझौते की तैयारी में है।
केंद्र की ओर से दोनों संगठनों के साथ वार्ता कर रहे एबी माथुर ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों संगठनों से बातचीत अच्छी चल रही है और जल्द की समझौता हो सकता है। माथुर इन संगठनों के अलावा मणिपुर के कुकी संगठन के साथ भी वार्ता के मध्यस्थ हैं। उन्होंने बताया कि कुकी संगठन में 29 गुट होने के बाद भी बातचीत आगे बढ़ी है। उल्फा और एनडीएफबी से एक-दो महीने में शांति समझौता होने की संभावना है। माथुर के मुताबिक, अब असम की स्थिति पहले से काफी बदल चुकी है। लोग अब विकास चाहते हैं।
Published on:
05 Nov 2019 01:10 am
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