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Asha Dashmi मनचाहा वर प्राप्त करने का श्रेष्ठ व्रत, यात्रा या विदेश गए पति को भी जल्द बुला सकती हैं सुहागिनें

माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं को आशा दशमी व्रत रखा जाता है। इसे किसी भी माह को प्रारंभ कर सकते हैं। धर्म ग्रंथों में आशा दशमी व्रत का महत्व उल्लिखित किया गया है। द्वापर युग में स्वयं भगवान भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की कथा सुनाते हुए इसे महिलाओं के लिए सबसे लाभकारी व्रत बताया था।

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Asha Dashmi Vrat Ka Mahatva Kartik Snan Ka Mahatva Kartik Purnima

Asha Dashmi Vrat Ka Mahatva Kartik Snan Ka Mahatva Kartik Purnima

जयपुर. माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं को आशा दशमी व्रत रखा जाता है। इसे किसी भी माह को प्रारंभ कर सकते हैं। धर्म ग्रंथों में आशा दशमी व्रत का महत्व उल्लिखित किया गया है। द्वापर युग में स्वयं भगवान भगवान श्रीकृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत की कथा सुनाते हुए इसे महिलाओं के लिए सबसे लाभकारी व्रत बताया था।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार किसी भी शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को आरम्भ कर यह व्रत छह माह, एक वर्ष या दो वर्ष तक करना चाहिए। इस व्रत में रात में अपने आँगन में अलक, फूल तथा चन्दन आदि से दस आशा देवियों की पूजा करते हैं। जौ अथवा पिष्टातक से दसों दिशाओं के अधिपतियों को ऐन्द्री आदि दिशा-देवियों के रूप में मानकर पूजा की जाती है।

श्रीकृष्ण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से राजपुत्र अपना राज्य पा सकते हैं, वणिक व्यापार में लाभ और पुत्रार्थी पुत्र प्राप्त कर सकते हैं। धर्म, अर्थ एवं काम की सिद्धि प्राप्त की जा सकती है. ब्राह्मण आशा दशमी व्रत से निर्विघ्र यज्ञ सम्पन्न कर सकता है। असाध्य रोगों से पीड़ित रोगी रोग मुक्त हो जाता है। सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से कन्या श्रेष्ठ और मनचाहा वर प्राप्त कर सकती है। जिनके पति लंबी यात्रा-प्रवास से लौट कर न आ पा रहे हों तो इस व्रत के द्वारा सुहागिनें उन्हें जल्द वापस प्राप्त कर सकती हैं। इससे शिशु के दांतों की पीड़ा भी दूर हो जाती है। किसी भी कष्ट की निवृत्ति के लिए इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा से करना चाहिए।

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