
प्रदेश में नई भजनलाल शर्मा सरकार के पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यक्रमों को बंद किए जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। साथ ही शुरू हो गया है ऐसे मुद्दों पर सियासत और बयानबाज़ी का सिलसिला। शुरुआत हुई है पूर्ववर्ती सरकार के दौरान शुरू हुए 'राजीव गांधी युवा मित्र इंटर्नशिप कार्यक्रम' से, जिसे वर्त्तमान भाजपा सरकार ने बंद करने के आदेश जारी किए हैं।
इधर, सरकार के आदेश पर सबसे ज़्यादा नाराज़गी खुद पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने जताई है। उन्होंने अपने एक बयान में यहां तक कह दिया है कि अगर सरकार को राजीव गांधी के नाम से इतनी है परेशानी है, तो कार्यक्रमों और योजनाओं का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता रहे स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रख लें।
'सेवाएं समाप्त करना सही नहीं'
पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि राजीव गांधी युवा मित्र इंटर्नशिप कार्यक्रम में शामिल करीब 5 हज़ार युवा सरकार की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने का काम कर रहे थे, लेकिन अब उनकी सेवाएं समाप्त की जा रही हैं, जो उचित नहीं है। नई सरकार को इस योजना के नाम से परेशानी थी तो राजीव गांधी सेवा केन्द्रों की भांति नाम बदलकर अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर कर सकती थी।
'हमने तो अस्थाई को स्थाई किया था'
पूर्व सीएम ने अपने शासनकाल को याद दिलाते हुए कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में आई थी तब पूर्व की भाजपा सरकार द्वारा अस्थायी तौर पर लगाए गए पंचायत सहायकों को स्थाई करके उनका वेतन बढ़ाया गया था। ऐसी ही सकारात्मक सोच से नई सरकार को भी राजीव गांधी युवा मित्र इंटर्नशिप कार्यक्रम को जारी रखना चाहिए।
कार्यक्रम बंद करने के आदेश जारी
भजनलाल सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय स्वीकृत कई प्रोजेक्ट्स पर रोक लगाने के बाद अब राजीव गांधी युवा मित्र इंटर्नशिप कार्यक्रम को बंद कर दिया है। आर्थिक एवं सांख्यिकी निदेशालय ने सोमवार को 31 दिसंबर 2023 से इस कार्यक्रम को समाप्त किए जाने का आदेश जारी किए हैं। अशोक गहलोत सरकार ने वर्ष 2021-22 में इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
इंदिरा रसोई का नाम बदलेगी सरकार
पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के समय इस योजना का नाम अन्नपूर्णा रसोई था, जिसे गहलोत सरकार ने बदलकर इंदिरा रसोई योजना कर दिया था। कांग्रेस सरकार के समय योजना का जबर्दस्त विस्तार भी हुआ और रसोई की संख्या एक हजार तक पहुंच गई। मगर अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बन गई है। ऐसे में चर्चा है कि रसोई का नाम बदलकर दोबारा अन्नपूर्णा रसोई किया जा सकता है। गौरतलब है कि गहलोत सरकार ने 2020 में 213 निकायों में 358 रसोई के साथ येाजना को शुरू किया था। अब योजना में रसोई की संख्या 1 हजार पहुंच गई है। कोरोना काल में करीब 72 लाख लोगों को योजना के तहत भोजन निशुल्क भोजन कराया गया था।
प्रधानमंत्री तक दे चुके हैं आश्वासन
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने चुनावी दौरे में आश्वस्त कर चुके हैं कि भाजपा सरकार बनने पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की किसी भी योजना को बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि उसमें और सुधर लाने के प्रयास होंगे।
Published on:
26 Dec 2023 11:01 am
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