
जयपुर।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को देश के अनूठे मंदिरों में शुमार पुडुचेरी के ऑरोविले शहर स्थित मातृमंदिर पहुंचे। उन्होंने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए इस अनुभव को अद्भुत और ज्ञानवर्धक बताया। सीएम गहलोत ने कहा कि यह मंदिर यह पुष्ट करता है कि ये दुनिया संपूर्ण मानवता के लिए है।
भारत का अनूठा मंदिर है मातृमंदिर
पुडुचेरी का मातृमंदिर ऑरोविले शहर के बीचोंबीच स्थित है, जिसे "एक उत्कृष्ट एवं मौलिक स्थापत्य उपलब्धि" के रूप में जाना जाता है। मातृमंदिर के भीतर क्षेत्र की शांति सुनिश्चित करते हुए मौन रखा जाता है और मातृमंदिर के आसपास का पूरा क्षेत्र "प्रशांत क्षेत्र" कहलाता है। इस प्रशांत क्षेत्र की तीन मुख्य विशेषताएं हैं:- बारह बगीचों वाला स्वयं मातृमंदिर, बारह पंखुरियां और भविष्य की झीलें, रंगभूमि और बरगद का पेड़।
इस अद्भुत मंदिर का निर्माण फरवरी 2008 में पूरा हुआ। हालांकि इसके निर्माण की योजना 1971 में बनी थी। वास्तव में यह एक गोल सुनहला प्रार्थना कक्ष है। इसके निर्माण में कुल 37 साल का लंबा वक्त लगा। यह विशाल मंदिर चार स्तंभों पर खड़ा है, जो क्रमश: माहेश्वरी, महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती का प्रतीक हैं। इस मातृ मंदिर में साधना की इच्छा रखने वाले लोगों को विशेष साक्षात्कार से होकर गुजरना पड़ता है।
मंदिर तक जाने के लिए पहले स्वागत कक्ष में मंदिर के बारे में 15 मिनट की एक फिल्म दिखाई जाती है। इसके बाद विजिटर पास जारी किए जाते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए एक किलोमीटर की मनोरम यात्रा पैदल करनी पड़ती है। रास्ते में एक विशाल बरगद का पेड़ आता है, जो इतना पुराना है कि उसकी कई सहायक जड़ें जमीन से आकर जुड़ गई है। मंदिर से वापसी के लिए नि:शुल्क शटल बस सेवा चलाई जाती है।
मंदिर सोमवार से शनिवार तक सुबह 9 बजे से 1 बजे और 2 बजे से 4.30 बजे तक खुला रहता है। यह रविवार की शाम को आम दर्शकों के लिए बंद रहता है।
मातृमंदिर के भीतर एक कुंडलित ढलान ऊपर की ओर एक कान्तिमान श्वेत संगमरमर से बने वातानुकूलित कक्ष "व्यक्ति की चेतना को ढूंढने का स्थान" की ओर जाता है। इसके केंद्र में सूर्य की एकमात्र किरण के साथ स्वर्णिम आभा वाला 70 सेंटीमीटर का एक स्वर्णिम क्रिस्टल बॉल है, जो संरचना के शीर्ष से भूमंडल की ओर निर्देशित होता है।
कहा जाता है कि यह स्वर्णिम क्रिस्टल बॉल "भविष्य की अनुभूति के प्रतीक" का प्रतिनिधित्व करता है। जब सूर्य नहीं होता या डूब जाता है तो ग्लोब के ऊपर के सूर्य की रश्मि के स्थान पर एक सौर ऊर्जामान प्रकाश की किरण बिखेरी जाती है। मातृमंदिर का अपना एक सौर ऊर्जा संयंत्र है और यह साफ़-सुथरे बागानों से घिरा है।
इस केंद्र के आभामंडल में शहर के चार "क्षेत्र" हैं : "आवासीय क्षेत्र", "औद्योगिक क्षेत्र", "सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र" तथा "अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र"। शहर या नगरी क्षेत्र के आसपास एक हरित पट्टी है जो एक पर्यावरण अनुसंधान तथा संसाधन क्षेत्र है, जिसमें खेत एवं वन, एक वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, औषधीय एवं जड़ी बूटी वाले पौधे, जलग्रहण बांध एवं कुछ समुदाय शामिल हैं।
Source: Wikipedia
Updated on:
08 Jan 2020 03:58 pm
Published on:
08 Jan 2020 03:55 pm

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