
देश की दोनों बड़ी पार्टियां ही नहीं चाहती कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़े। इसकी एक बानगी देखने को मिल रही है जारी की गई प्रत्याशियों की सूची में। हर बार की तरह इस बार भी महिला प्रत्याशी 10 प्रतिशत से भी कम… यह हाल तो तब है जब प्रधानमंत्री खुद महिलाओं के लिए हर दिन नई योजना की बात करते हैं, महिला सशक्तीकरण की बात करते हैं और भाजपा की चुनाव समिति महिलाओं को सम्मानजनक सीटें भी नहीं दे पाती। यानी आधी आबादी को राजनीति में बराबरी का दर्जा पाने के लिए अभी और इंतजार करना होगा