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राजस्थान से भी अटल बिहारी वाजपेयी का रहा गहरा नाता

राजस्थान से भी अटल बिहारी वाजपेयी का रहा गहरा नाता

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Atal Bihari Vajpayee

जब देर रात दुकान पर नमकीन लेने पहुंच गए थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी

जयपुर।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का राजस्थान से गहरा नाता रहा है। उनसे जुड़ी कई यादें कई किस्से आज भी यहां के लोगों की जुबान पर है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री भैरोसिंह शेखावत और दूसरा नाम शिव कुमार पारीक ये शख्स अटल बिहारी वाजपेयी के साथ साये की तरह रहे। शिवकुमार पारीक का रौबदार किरदार,छह फुट लंबा शरीर,घनी मूंछें और भगवान शंकर के परम भक्त तो हैं हीं मगर अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनका रिश्ता राम-हनुमान से कम का नहीं था।

शिवकुमार पारीक का अटल बिहारी वाजपेयी के साथ जुड़ना किसी इत्तेफाक से कम नहीं था। वाजपेयी से जुड़ने से पहले शिवकुमार आरएसएस से जुड़े थे और अपनी फिटनेस के चलते वो औरों से अलग दिखते और मृदुभाषी भी थे। उनकी ये दोनों विशेषताएं वाजपेयी को रास आई। उनकी नजदीकी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निधन के बाद से शुरु हुई। जब बलरामपुर से वाजपेयी ने चुनाव लड़ा,तब किसी ने सुझाव दिया कि वाजपेयी को एक ऐसे सहयोगी कि जरूरत है जो उनकी रक्षा भी करे। बहुत तलाश के बाद नानाजी देखमुख ने राजस्थान में जयपुर में रह रहे शिवकुमार पारीक का नाम सुझाया।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ शिवकुमार पारीक कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह घुल-मिल चुके थे कि वाजपेयी की गैरमौजूदगी में शिवकुमार पारीक ही लखनऊ में उनका सारा काम-काज संभालते नजर आते। वाजपेयी की अब तक की दिनचर्या में शिवकुमार पारीक एक पारिवारिक सदस्य की तरह ही उनका ख्याल रखते आए हैं।

वहीं अजमेर से पांच बार सांसद रहे प्रो.रासासिंह रावत ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी उन्हें प्रोफेसर नहीं डॉक्टर कहकर पुकारते थे। संसद में जब भी किसी पर बोलना होता तो वे कहते जब रासासिंह रावत हैं तो फिर चिंता नहीं है वे ही बोलेंगे। उन्हें भरोसा था कि किसी भी बिल पर बोलने की बात तो रावत अच्छा बोलेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से कोटा की कई यादें जुड़ी हैं। स्व.हरिकुमार औदिच्य के निकट रहे अशोक शुक्ला व स्व.हरिकुमार औदिच्य स्मृति संस्थान के अनिल औदिच्य बताते हैं कि वे जब भी कोटा आते और रात्रि विश्राम टिपटा क्षेत्र स्थित बड़े देवताजी की हवेली में ठहरते थे। एक बार अटलजी कोटा आए तो हवेली में रात को ठहरे। अगली सुबह उन्हें झुंझुनूं जाना था। सुबह करीब 4.30 बजे खुद हरिकुमार औदिच्य वाजपेयी के लिए चाय लेकर गए तो वाजपेयी कपड़े पहनकर जाने की तैयारी में बैठे मिले। यह देख औदिच्य चौंक गए। पूछा तो वाजपेयी मुस्कुराते हुए बोले, 'भाई यहां नीचे पोळ में चबूतरे पर जो सोए हुए थे, उनका करुण कृंदन (खर्राटे) मुझसे सहन नहीं हुआ। मुझे नींद नहीं आई तो सोचा क्यों न तैयार हो जाऊं। मैं नहा धोकर अब पूजा-पाठ कर तैयार बैठा हूं। शुक्ला बताते हैं कि ऊंचे कद के नेता होने के बावजूद उन्होंने बुजुर्ग चौकीदार रामकिशन को टोकना उचित नहीं समझा।