
जयपुर। केन्द्र सरकार आयुष यानी आयुर्वेद, होम्योपेथी, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा आदि वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता और चलन के बारे में देशव्यापी सर्वे कराएगी। इस दौरान भुखमरी व गरीबी सूचकांक, शिक्षा, असमानता, स्वच्छ जल की उपलब्धता, स्वास्थ्य, लैंगिक समानता जैसे 17 विकास लक्ष्यों के संबंध में भी जानकारी जुटाई जाएगी।
राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के जयपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के 79वें दौर के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को यहां शुभारम्भ हुआ। प्रशिक्षण में 135 प्रतिभागी भाग ले रहे है, जिसमें जयपुर, अलवर, कोटा, श्रीगंगानगर जिलों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं। सर्वेक्षण एक जुलाई 22 से शुरू होगा, जो जून 23 तक चार चरण में पूर्ण होगा। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के क्षेत्रीय उप महानिदेशक ज्योति प्रसाद आर्य ने बताया कि सर्वेक्षण में मोबाइल, कम्प्युटर व इन्टरनेट के उपयोग, जलापूर्ति, स्वच्छता, परिवहन सेवा, शिक्षा, रोजगार एवं स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च के साथ ही सहस्त्राब्दि विकास के 17 लक्ष्यों के बारे में सवाल पूछे जाएंगे। कोरोनाकाल में आमजन के लिए उपयोगी साबित हुई आयुर्वेद, होम्योपेथी, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा आदि वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के चलन और उपयोग के बारे में भी सवाल पूछे जाएंगे। इस मौके पर कोलकाता से आए उप महानिदेशक अमिताभ शाह ने कहा कि आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। इसके लिए आंकड़ों की सटीकता व समय पर काम पूरा किया जाना आवश्यक है।
केंद्र सरकार के सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा इन्ही 17 सतत विकास लक्ष्यों के कुछ संकेतकों पर वस्तुस्थिति जानने के लिए देश-व्यापी 79वें दौर के अंतर्गत ‘व्यापक वार्षिक मॉड्यूलर सर्वेक्षण करवाया जा रहा है ।
Updated on:
15 Jun 2022 01:58 am
Published on:
14 Jun 2022 02:15 am
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