
जितेन्द्र सिंह शेखावत
जयपुर। औघड़ बाबा योगी बालकनाथ का बरसों पहले लुनियावास गोनेर मार्ग पर जागृत किया धूणा आज भी जागृत है। गुरु गोरखनाथ नाथ और भृतहरीजी की शिक्षा और सिद्धांतों की अलख जगाने के लिए बाबा ने बड़ा द्वार बनवाकर आश्रम स्थापित किया था। नाथ योगियों की तपस्या स्थली रहे आश्रम में इन दिनों सबसे बड़ा और एक साल तक चलने वाला महामृत्युजंय रुद्र महायज्ञ हो रहा है। इसके अलावा यहां आए दिन बड़े-बड़े धार्मिक अनुष्ठानों की ज्योति प्रज्वलित होती रहती है।
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नाथ बाबा के इस आश्रम में आ चुके हैं। वर्ष 2016 में सबसे बड़े 9 हजार 108 कुंडीय यज्ञ में योगी आदित्यनाथ आए थे। आचार्य कमलेश शास्त्री के मुताबिक कोटपूतली के फतेहपुरा कलां के बाबा बालकनाथ बरसों पहले घूमते हुए लुनियावास जंगल में आए और पांच बड़े वटवृक्षों के नीचे बैठ तपस्या करने लगे। इससे पहले उन्होंने जवाहर नगर टीले और खानियां में रहकर भी तपस्या की। लाल मिर्च और केवल छाछ के आहार से बाबा ने पूरा जीवन बिताया।
मन मौजी रहे बाबा तपस्या के दौरान वट वृक्ष पर लटक जाते और बांसुरी बजाते रहते। सर्दी में भी जल और बर्फ में बैठ तपस्या करते। पावटा में भी आश्रम बनवाया और बीस साल तक मौन धारण किया। इटली में इनका आश्रम है। बाबा के शिष्य नाथ योगी बाबा बस्तीनाथ ने बताया कि बालकनाथ बचपन में गाय चराते और एक रोटी के चार टुकड़े कर चारों दिशाओं में फेंकने के बाद चरवाहों के साथ भोजन ग्रहण करते।
बाबा ने नारायणपुर में योगी शंभूनाथ आश्रम में दफन चिमटा, स्वर्ण मंडित खड़ाऊ और कड़ा आदि को भी बाहर निकाला था। नाथ योगी भृतहरीनाथ की अलख जगाते हुए वे बाबा संज्यानाथ से मिले और उनसे दीक्षा ग्रहण की। बाबा के त्याग और भक्ति से प्रभावित हो हजारों लोग शिष्य बने। नाथ पंथ के इस औघड़ पीर बाबा के धूणे की भभूती लेने वालों की शाम को आरती के समय भीड़ लगी रहती है।
सन् 1981 की बाढ़ में खानिया बांध टूटने के बाद इलाके में पेयजल की समस्या होने के बाद से आश्रम कई कॉलोनियों में टैंकरों से पानी वितरण करता है। बालकनाथ बाबा का शुरू किया अन्न क्षेत्र का भंडारा आज भी ल रहा है। आश्रम में बाबा की गुफा के अलावा विश्व मोहनी और भैरवनाथ का लोग दर्शन करते हैं।
Published on:
17 Feb 2020 02:11 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
