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Barley more expensive than wheat: इतिहास में पहली बार गेहूं से महंगा बिक रहा जौ

मांग की तुलना में उत्पादन कम होने से इतिहास में पहली बार जौ ( barley ) के दाम गेहूं से ज्यादा हो गए है। जयपुर मंडी में लूज जौ 2950 से 3100 रुपए प्रति क्विंटल बेचा गया, जबकि कर सहित जौ ( Barley crop ) की कीमतें 3400 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास बोली जा रही हैं।

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Barley more expensive than wheat:  इतिहास में पहली बार गेहूं से महंगा बिक रहा जौ

Barley more expensive than wheat: इतिहास में पहली बार गेहूं से महंगा बिक रहा जौ

मांग की तुलना में उत्पादन कम होने से इतिहास में पहली बार जौ के दाम गेहूं से ज्यादा हो गए है। जयपुर मंडी में लूज जौ 2950 से 3100 रुपए प्रति क्विंटल बेचा गया, जबकि कर सहित जौ की कीमतें 3400 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास बोली जा रही हैं। वर्तमान में चौमू, श्रीमाधोपुर एवं जयपुर मंडी में 15 हजार बोरी के आसपास प्रतिदिन जौ उतर रहा है। मंडियों में जौ की क्वालिटी भी हल्की आ रही है। जानकारों का कहना है कि पिछले साल जौ का उत्पादन अपेक्षाकृत कम हुआ था, परिणामस्वरूप पूरे साल जौ की शॉर्टेज बनी रही। इस साल भी जौ की बिजाई कम होने के साथ-साथ प्रति हैक्टेयर उत्पादकता भी घटी है। माल्ट कंपनियों की मांग की तुलना में उत्पादन कम होने से पिछले एक माह में जौ के भाव 65 फीसदी तक बढ़ गए है। जौ व्यापारी के.जी. झालानी ने बताया कि जौ में बड़ी कंपनियों की खरीद चल रही है। प्रोटीन युक्त आहार बनाने वाली कंपनियां भी जौ की खरीद करने लगी हैं। लिहाजा जौ के भाव और ऊंचे भी जा सकते हैं। पिछले साल देश में 18 लाख टन जौ का उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार 12 लाख टन जौ की पैदावार होने का अनुमान है।

यूक्रेन व रूस से होता है आयात
भारत में जौ की पैदावार कम और खपत ज्यादा है, इसलिए विदेशों से जौ की आयात भी किया जाता है। देश में सबसे ज्यादा जौ यूक्रेन व रूस से आता है। जहां से आयात का 60 फीसदी से भी ज्यादा जौ मिलता है। इसके अलावा आस्ट्रेलिया का भी जौ बाजार में उपलब्ध है, लेकिन रूस के यूक्रेन पर किए गए हमले से आयात ठप हो गया है। मांग ज्यादा होने व पैदावार कम होने से भी जौ के भाव आसमान छू रहे है।

माल्ट कंपनियों में 80 फीसदी खपत
जौ की सबसे ज्यादा खपत माल्ट कंपनियों में होती है। कुल जौ की 80 फीसदी खरीद माल्ट कंपनियां करती है, जिसे वो सालभर उपयोग करते है। जौ के इस माल्ट से बीयर बनाई जाती है। इसके अलावा जौ का सबसे ज्यादा उपयोग पशु आहार बनाने में किया जाता है।


रूस-यूक्रेन युद्ध से इस बार जौ का आयात घटा है। मांग की तुलना में उत्पादन नहीं होने से जौ के भाव ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गए है। इस बार किसानों ने सरसों के उत्पादन पर ज्यादा ध्यान दिया है, जिससे जौ का एरिया घटा है। माल्ट कंपनियां अपना पूरे साल का कच्चा माल का स्टॉक करती है, इसलिए जौ के दाम लगातार बढ़ रहे है। बाबूलाल गुप्ता, अध्यक्ष, राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ