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Basant Panchami : गोविंददेवजी काे धारण कराई पीत पोशाक, किया मनमोहक बसंतिया शृंगार

माघ माह की शुक्ल पंचमी को रविवार को श्रद्धा उल्लास के साथ बसंत पंचमी के पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में बसंत पंचमी पर्व का उल्लास नजर आया।

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Basant panchami

जयपुर. माघ माह की शुक्ल पंचमी को रविवार को श्रद्धा उल्लास के साथ बसंत पंचमी के पर्व के रूप में मनाया जा रहा है। सुबह से ही मंदिरों में बसंत पंचमी पर्व का उल्लास नजर आया। सुबह से ही मंदिरों में बसंत पंचमी पर्व का उल्लास नजर आया। माता सरस्वती की विशेष पूजा अर्चना की गई। शहर के अराध्य गोविंददेवजी मंदिर में ठाकुरजी का प्रकाट्य उत्सव मनाया गया। वहीं अन्य मंदिरों में भी विशेष आयोजन हुए।

ठाकुरजी का अभिषेक कर अर्पित की पांच तरह की गुलाल

आराध्य गोविंददेवजी मंदिर में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में ठाकुरजी का वेद मंत्रों से पंचामृत अभिषेक कर आरती उतारी। इससे पहले ठाकुर जी का वेद मंत्रों के साथ पंचामृत अभिषेक कर नवीन पीली पोशाक धारण कराई गई। साथ ही पीत आभामय शृंगार झांकी सजाई गई। धूप झांकी खुलने पर पहले अधिवास पूजन हुआ। इसके बाद धूप झांकी में ठाकुर श्रीजी को बेसन के लड्डू का भोग अर्पण किया गया। शृंगार झांकी के बाद मां भगवती सरस्वती का पूजन जगमोहन मध्य में ठाकुर श्रीजी के सन्मुख किया गया। इस दौरान ठाकुर श्रीजी को पांच प्रकार गुलाल, इत्र का अर्पण किया गया। इसके साथ ही ठाकुरजी की गुलाल की सेवा भी शुरू हो गई, जो होली तक चलेगी। मंदिर के सेवाधिकारी मानस गोस्वामी ने बताया कि इससे पहले सुबह मंदिर कीर्तनिया एवं परिकर जन ने मंगल गीत एवं बधाई गान से दिवस की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि आज ही के दिन श्री रूप गोस्वामी पाद ने ठाकुर श्री गोविंददेवजी को गोमा टीला से प्रगट किया। इस कारण माघ शुक्ला पंचमी के दिन ठाकुर श्री जीऊ का पाटोत्सव (पट्टाभिषेक) अनुष्ठान मनाया जाता आ रहा है।

पुष्प बंधनवार से सजे मंदिर

सुभाष चौक पानों का दरीबा स्थित आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज में पीठाचार्य अलबेली माधुरी शरण के सान्निध्य में विभिन्न कार्यक्रम हुए। सरस परिकर के प्रवक्ता प्रवीण बड़े भैया ने बताया कि सुबह ठाकुर राधा सरस बिहारी जू सरकार का अभिषेक कर शृंगार आरती के दर्शन कराए गए। पुष्प बंदनवार से सजे सरस निकुंज में सेवा में विराजित गुरू आचार्य पादुका की सेवा अर्चना कर आचार्य वाणियों (साहित्य) और परम्परागत आचार्यों की पदावली वाणी का भी पूजन किया गया।