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कागजों में सुंदर द्रव्यवती, सच में दामन पर दाग

जेसल्या से गोनेर के आगे ढूंढ नदी तक 47.5 किमी लम्बी द्रव्यवती नदी के हिस्सों पर कहीं भराव डाला तो कहीं बन गई चारदीवारी, एक दर्जन से ज्यादा सुविधाओं

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Shankar Sharma

Mar 22, 2016

Jaipur news

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भवनेश गुप्ता
जयपुर.जेसल्या से गोनेर के आगे ढूंढ नदी तक 47.5 किमी लम्बी द्रव्यवती नदी के हिस्सों पर कहीं भराव डाला तो कहीं बन गई चारदीवारी, एक दर्जन से ज्यादा सुविधाओं के लिए जगह ही चिह्नित नहीं ।

प्रशासन का दावा

शहर से गुजर रही द्रव्यवती नदी (अमानीशाह नाला) की काया बदलेंगे, इसे सचमुच नदी की शक्ल देंगे। इस पर 1676.93 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें राज्य सरकार 1470.85 करोड़ रुपए का कर्ज भी लेगी। इसके लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

सच आपके सामने

पड़ताल में सामने आया कि ऋण लेकर 'घी' पीने का सपना देख रही सरकार का कागजी पुलिन्दा सच से बहुत दूर है। मौके की स्थिति नदी के सौन्दर्यकरण के दावों का मुंह चिढ़ा रही है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए चिह्नित 11 में से 6 जगह तो कब्जे हो रहे हैं। कई जगह वांछित भूमि ही उपलब्ध नहीं है।

पत्रिका की पड़ताल
शहर के लिए यह प्रोजेक्ट काफी अहम है, इसके मद्देनजर राजस्थान पत्रिका ने सोमवार को इससे जुड़े पूरे क्षेत्र में गहन पड़ताल की। इसमें देखा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में क्या सपने दिखाए गए हैं, मौके पर वास्तविक स्थिति क्या है, हजारों करोड़ के इस कागजी प्लान की हकीकत क्या है।


सुलग रहा सवाल

अनुबंधित कंपनी और जेडीए के अफसरों ने खुद माना है कि डीपीआर और मौके की स्थिति में काफी अन्तर आ गया है। इस कारण प्रस्तावित सुविधाओं के लिए अब दोबारा जगह चिह्नित करनी होगी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बहाव क्षेत्र और उससे सटी सरकारी जमीन बचाई क्यों नहीं जा रही।

ख्वाब दिखाए, जगह का पता ही नहीं

नदी किनारे टाउन स्क्वायर, कॉमर्शियल पार्क, कल्चरल प्लाजा, फैशन स्ट्रीट, इको पार्क, फ्लोटिंग गार्डन, जॉगिंग पार्क, नेचर ट्रेल, सामुदायिक उद्यान विकसित करने की प्लानिंग है। इसी के जरिए जेडीए को कमाई का ख्वाब भी दिखाया गया है लेकिन डीपीआर में इनकी जगह ही चिह्नित नहीं है। बहाव क्षेत्र व इससे सटी सरकारी जमीन को बचाने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा जबकि भूमाफिया सक्रिय हैं।

यहां हैं कब्जों की भरमार

5.1 किमी, किशनबाग के पास बहाव क्षेत्र के दोनों तरफ फिर से जमीन पर कब्जा करने का काम शुरू, दो जगह चारदीवारी।

7.9 किमी, अम्बाबाड़ी मलबा-मिट्टी डालकर नदी का बहाव क्षेत्र छोटा करने का काम चल रहा है। एक हिस्से में भराव कर बस अड्डा ही बना दिया गया है। जबकि यहां 10 एमएलडी क्षमता के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जगह चिह्नित की गई है।

14 किमी,सुशीलपुरा पुलिया से पहले केवल यही स्थान है, जहां नगर निगम को 150 फीट से ज्यादा चौड़ी जगह उपलब्ध हुई लेकिन यहां भी नाले की तरफ कब्जा बढ़ रहा है। खुद निगम ने इसे डंपिंग ग्राउंड में तब्दील कर दिया है। यहां 5 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनना है।

16.7 किमी, गुर्जर की थड़ी के पास नदी से सटे हिस्से की सरकारी जमीन पर कब्जा। भराव व लेवलिंग काम धड़ल्ले से चल रहा है। जबकि यहां बहाव क्षेत्र के अलावा काफी जगह उपलब्ध है। यहां 15 एमएलडी क्षमता का प्लांट बनना है।

17.7 किमी, सौंखिया फार्म हाउस के पास यहां बहाव क्षेत्र का गला घोंटकर 30-40 फीट ही कर दिया गया है। शिप्रा पथ से जोडऩे के लिए नाले में ही अस्थाई सड़क तक बना ली गईह ै। कब्जा कर नाले की तरफ बढ़ा जा रहा है।

18 किमी, नीरजा मोदी स्कूल के पास मलबा-मिट्टी का भराव डालकर अवैध तरीके से भूखण्ड सृजित करने का खेल चल रहा है। ज्यादातर हिस्सा समतल कर दिया गया है। यहां 10 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रस्तावित है।

20.5 किमी, रिद्धि-सिद्धि पुलिया के पास नदी व उससे सटी सरकारी जमीन पर कब्जा कर चारदीवारी बना ली गई है। इसके पास सरकारी जमीन हथियाकर बसाई गई जगन्नाथपुरी कॉलोनी में बड़ा कब्जा है। यहां सबसे ज्यादा क्षमता का 40 एमएलडी का प्लांट प्रस्तावित है।

21.6 किमी, महारानी फार्म के नजदीक (शिप्रा पथ साइड) बहाव क्षेत्र में लगाए गए अलाइमेंट पिलर के आगे तक भूमाफिया पसर गए। यहीं लम्बी-चौड़ी जमीन पर ऊंची चारदीवारी बनाने का काम धड़ल्ले से चल रहा है जबकि जेडीए यहां कई बार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर चुका है। कच्ची बस्ती तक का दायरा फैल गया है।

24 किमी, सांगासेतु ब्रिज से पहले यहां 210 फीट से ज्यादा चौड़ाई में जमीन उपलब्ध है लेकिन सांगानेर हिस्से में फैक्ट्री संचालक व भू-कारोबारी भराव डालने में जुटे हैं। दो बार तो बहाव क्षेत्र तक घुमा चुके। अब भी कब्जा नहीं हटाया गया। यहां 15 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है।

27.1 किमी,, शिकारपुरा रोड तय चौड़ाई से ज्यादा जगह मौजूद है लेकिन मलबा डालने का काम बंद नहीं हुआ।

कंपनी-अफसर मान रहे, बदल गई स्थिति
विस्तृत परियोजना रिपोर्ट पर काम एक साल पहले शुरू हुआ। एसटीपी के लिए प्रस्तावित जगह पर निर्माण होने से अब जगह बदलेंगे। अफसर चिह्नित जगह को प्रस्तावित होने का तर्क दे बदलने की तैयारी में हैं। क्योंकि, चिन्हित जगह में से ज्यादातर इलाकों में या तो जमीन पर कब्जा है, या निर्माण भी हो चुके हैं। पिछले दिनों जेडीए में हुई बैठक में कंपनी अधिकारियों ने यह स्थिति बताई थी।

11 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, 6 जगह कब्जे
द्रव्यवती के गंदे पानी को परिशोधित करने के लिए 180 एमएलडी क्षमता के 11 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनने हैं। इसके लिए डीपीआर में जगह भी प्रस्तावित कर दी गई। हालांकि इनमें से प्रस्तावित 6 जगह पर तो कब्जे हो रहे हैं। कहीं आउटर लाइन के पिलर ही कब्जे में खो गए तो कहीं मलबा-मिट्टी का भराव डालकर भूखण्ड सृजित करने का खेल चल रहा है।