
पत्रिका न्यूज नेटवर्क/जयपुर। दिगंबर जैन धर्मावलंबियों ने सोमवार को रोट तीज पर्व मनाया। श्रद्धालुओं ने जैन मंदिरों में चौबीस तीर्थंकरों की पूजा की। महिलाओं ने व्रत-उपवास किए। घरों में रोट, खीर और तुरई का रायता बनाया गया। फिर इसे मंदिरों में पाट पर चढ़ाया।
उधर, मंगलवार से दशलक्षण महापर्व की शुरुआत होगी। इस दौरान 28 सितंबर तक जैन मंदिरों में पूजा अर्चना के विशेष आयोजन होंगे। मंगलवार को धर्म का उत्तम क्षमा लक्षण के तहत मंदिरों में सुबह क्षमा धर्म पर पूजा होगी। शाम को प्रवचन में मुनि-साध्वी क्षमा धर्म का महत्व समझाया जाएगा। साथ ही वे जीवन में दस धर्म के महत्व पर संबोधन देंगे। युवा-महिला मंडलों की ओर से सांस्कृतिक-धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
‘आत्म—धर्म को प्राप्त करने का पहला मार्ग है क्षमा’
प्रताप नगर, सेक्टर आठ स्थित जैन मंदिर में आचार्य सौरभ सागर के सान्निध्य में दशलक्षण पर्व विधान पूजन होगा। आमेर में मुनि उपाध्याय उर्जयंत सागर, पदमपुरा में आचार्य चैत्य सागर , बरकत नगर में आचार्य नवीननंदी व जनकपुरी में आर्यिका विशेषमति के सान्निध्य में विशेष आयोजन होंगे। आचार्य सौरभ सागर ने उत्तम क्षमा धर्म का महत्व बताते हुए कहा कि क्षमा आत्म-धर्म को प्राप्त करने का पहला मार्ग है। गौरतलब है कि जैन धर्म में उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य एवं उत्तम ब्रह्मचर्य सहित 10 धर्म होते हैं।
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आत्मा को जागृत करने का अवसर होता है पर्व - आर्यिका विशेष मति
जनकपुरी ज्योतिनगर जैन मंदिर में मंगलवार से बालयोगिनी आर्यिका विशेष मति माताजी के सानिध्य में दस लक्षण महापर्व महोत्सव भक्ति भाव के साथ शुरू हुआ । प्रबन्ध समिति अध्यक्ष पदम जैन बिलाला ने बताया कि प्रातः भगवान आदिनाथ की अष्ट धातु की प्रतिमा को विधान मण्डल पाण्डुशीला पर विराजित कर मंगल भावनाओं के साथ विश्व शान्ति हेतु बीजाक्षर युक्त शान्तिधारा आर्यिका श्री द्वारा बोली गई । शान्तिधारा करने का सोभाग्य सुनील अलका सेठी लवकुश नगर परिवार को मिला । इसके बाद जहाज़पुर प्रणेत्री गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी रचित दसलक्षण विधान पूजन शिखर चन्द किरण जैन द्वारा साज बाज के साथ कराया गया । जनकपुरी में चावल से बहुत ही सुंदर रंगीन कलात्मक विधान मण्डल तैयार किया गया है । इस मध्य बालयोगिनी आर्यिका विशेष मति माताजी ने अपने प्रवचन में कहा की सभी को एक बार फिर अवसर मिला है स्वयं को जानने का । दुनिया को जानने से कोई लाभ नहीं होगा । पर्व का अर्थ होता है स्वयं की आत्मा को जागृत करने का अवसर और इस दस लक्षण पर्व में भी नर से नारायण बनकर चारों और से आत्मा को जागृत कर धर्म मय बनाये । आर्यिका श्री ने आज के क्षमा धर्म के बारे में कहाँ की क्षमा को विवेक सहित पालन करे तथा पहले क्षमा के भाव को समझे । दिन में तत्वार्थ सूत्र का वाचन हुआ तथा शाम को आर्यिका श्री ने सामायिक करायी जिसके बाद आरती व रिद्धि मन्त्र युक्त ध्यान का आयोजन हुआ ।
Published on:
19 Sept 2023 04:03 pm
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