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पुष्कर मेले में सबसे ज्यादा बिके घोड़े और ऊंट,लेकिन गत सालों के मुकाबले मेले में कम आए पशु

खरीदारों की पहली पसंद बना मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा और रेगिस्तानी जहाज,

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Pushkar Camel Fair 2019

पुष्कर के मेला मैदान में पहुंचने लगे ऊंट।



जयपुर
इस साल लगे पुष्कर मेले का समापन हो गया हैं। हालांकि इस बार गत वर्षों के मुकाबले मेले में पशुओं की आवक काफी कम रही। पशुपालन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के अलग अलग जिलों से सात हजार से अधिक पशु यहां पहुंचे। जिसमें से पशु खरीदने आए पशुपालकों ने सबसे ज्यादा घोड़े और ऊंट खरीदें। हालांकि मेले मे आए पशुपालकों को निराशा ही हाथ लगी। क्योकि मेले में आए पशुओं में से आधे भी नहीं बिक सकें। पशुपालन विभाग के अनुसार मेले में कुल 7176 पशु आए जिनमें से 1848 पशुओं को ही खरीदारों ने खरीदा। इनमें भी सबसे ज्यादा घोड़े और ऊंट खरीदे गए। जिन पशुओं को खरीदार मिले उनमें 1072 घोड़े और 775 ऊंट बिके तो भैंस सिर्फ एक ही बिक सकी।
पांच हजार से अधिक पशुओं को नहीं खरीदा
मेले में आए पांच हजार पशुओं को किसी ने नहीं खरीदा। पशुपालकों का कहना है कि मेले में लगातर बिक्री कम होती जा रही हैं। वहीं पशुपालक भी लगातर सालों में कम पशु लेकर आ रहे हैं। क्योकि खरीददार नहीं मिलने से पशुपालकों की लागत भी नहीं निकल रही है। इस बार पशुपालकों को गत वर्ष के मुकाबले करीब एक करोड रुपए पशुओं की बिक्री से कम मिले हैं। पशुओं की बिक्री कम होने से पशुपालकों को अपने पशु वापस लेकर लौटना पड़ा।
मेले में नहीं बिकी एक भी गाय
इस बार के मेले में एक भी गाय की बिक्री नहीं हुई। गायों को एक भी खरीदने के लिए नहीं आया। मेले में इस बार कुल 80 गाय आई थी जिनमें से एक को भी किसी ने नहीं खरीदा। वहीं सिर्फ एक ही भैंस बिक सकी। मिली जानकारी के अनुसार इस बार 4.81 करोड रुपए के पशुओं की बिक्री मेले में हुई हैं।
भेड़, बकरा-बकरी, ***** तो आते ही नहीं
मेले में पहले भेड़, बकरा-बकरी, ***** का भी अच्छा व्यापार होता था। पशुपालक यहां पर काफी संख्या में लेकर इन्हें आते थे। लेकिन गत सालों में इनकी एक से दो दिखाई देने वाली संख्या इस बार ना के बराबर दिखाई दी। पशुपालकों का कहना है कि कभी यहां पर पशुओं को 25 करोड रुपए का व्यापार हुआ करता था। इस बार पुष्कर मेले से सभी पशुपालक निराश हाेकर लाैटे हैं। पशुपालकों की लागत भी मेले से नहीं निकली हैं। सिर्फ यहां पर वह खर्चा करके ही गई है और कमाई के मामले में उन्हें कुछ हाथ नहीं लगा हैं। गत सालों से आमदमी की घटती जा रही है। गत साल के मुकाबले भी इस बार करीक एक करोड रुपए कम की बिक्री हुई हैं।