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भामाशाह कार्ड है, फिर भी तरस रहे सहायता को

सरकारी कारिन्दों की लापरवाही राजधानी के कच्ची बस्तियों के सैकड़ों लोगों पर भारी पड़ रही है। भामाशाह कार्ड होने के बावजूद उनके खातों में सरकारी सहायता नहीं पहुंच पा रही है

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Shankar Sharma

Jan 31, 2016

Jaipur news

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जयपुर.
सरकारी कारिन्दों की लापरवाही राजधानी के कच्ची बस्तियों के सैकड़ों लोगों पर भारी पड़ रही है। भामाशाह कार्ड होने के बावजूद उनके खातों में सरकारी सहायता नहीं पहुंच पा रही है। सर्वे के दौरान भामाशाह कार्ड में बीपीएल नम्बर दर्ज नहीं होने से यह समस्या आई है। पिछले सप्ताह सरकार ने आर्थिक दृष्टि से कमजोर गरीब वर्ग के चयनित लोगों के बैंक खातों में दो हजार रुपए की सहायता राशि भेजी है। इस राशि के हकदार अनेक लोगों के खातों में यह रकम नहीं पहुंची है।


नहीं मिल रही पेंशन
श्रीराम का टीला की शकीला ने बताया कि वह बीपीएल में चयनित है लेकिन कम्पयूटर में उसे एपीएल दर्ज कर दिया गया है। मकबूला (90 ) के कार्ड में बीपीएल नम्बर नहीं डालने से उसको मासिक पेंशन नहीं मिल रही है। खेरु निशां ने बताया कि उसके भामाशाह कार्ड में किसी दूसरे के फोन नम्बर डाल दिए हैं। विधवा मंजू पीपीएल तो है लेकिन कार्ड में नम्बर नहीं डालने से उसे सरकारी सहायता नहीं मिल रही है।

काट रहे हैं चक्कर
वृद्धों और विधवाओं को सहायता के लिए बैंकों और ई-मित्र केन्द्रों पर चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सहायता राशि नहीं मिलने के बारे में इनको पता चला कि सर्वे कर्मचारियों ने उनके भामाशाह कार्ड में बीपीएल के नम्बर नहीं डाले हैं। बिना बीपीएल नम्बर के उनके बैंक खाते में रकम नहीं आ रही है। पत्रिका कार्यालय में आई महिलाओं ने बताया कि उनके राशन कार्ड में बीपीएल नम्बर का इंद्राज है लेकिन भामाशाह कार्ड में बीपीएल नम्बर नहीं चढ़ाने से सरकारी सहायता के दो हजार रुपए उनके खाते में नहीं आए। एक सामाजिक संगठन से जुड़े आनन्दी लाल सैन ने बताया कि नाहरी का नाका क्षेत्र में राजीव नगर, शहीद इन्द्रा ज्योतिनगर, श्रीराम का टीला आदि कच्ची बस्तियों में चयनित गरीब परिवारों के कार्डो में गलती रख देने से सरकारी सहायता से वंचित रहना पड़ रहा है।