
ये महिलाएं बनी भारत 'रत्न'
देश का सबसे बड़ा सम्मान है भारत रत्न, हाल ही में राष्ट्रपति भवन में देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, संघ विचारक नानाजी देशमुख और असम के गायक भूपेन हजारिका को इस सम्मान से सम्मानित किया गया है। अब तक 48 शख्सियतें इस सम्मान से सम्मानित हो चुकी हैं, 1954 में इस सम्मान की शुरूआत हुई थी। इनमें सिर्फ पांच महिलाएं है जिन्हें यह सम्मान मिला है और 2001 के बाद एक भी महिला ऐसी नहीं है जिसे भारत रत्न से नवाजा गया हो..आइये बताते हैं कि वो कौन-कौन-सी महिलाएं हैं जिन्हें यह सम्मान मिला और किस क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने पर उन्हें यह सम्मान दिया गया।
इंदिरा गांधी
इंदिरा गांधी पहली महिला थीं जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। 1971 में उन्हें यह सम्मान मिला। समाज सेवा के क्षेत्र में उन्हें उल्लेखनीय कार्य के लिए इस सम्मान से नवाजा गया। 1971 के भारत - पाकिस्तान युद्ध में बांग्लादेश को मुक्त कराया था। वे 1966 से 1977 और 1980 से 1984 तक देश की प्रधानमंत्री रहीं।
मदर टेरेसा
1971 में पहली बार इंदिरा गांधी को भारत रत्न मिलने के नौ साल बाद 1980 में मदर टेरेसा को भारत रत्न से सम्मानित किया गया। उन्हें भी समाज सेवा के क्षेत्र में इस सम्मान से सम्मानित किया गया। 1979 में उन्हें नोबल शांति पुरस्कार मिला था। पोप फ्रांसिस द्वारा 4 सिंतबर 2016 को उन्हें संत घोषित किया गया।
अरूणा आसफ अली
समाज सेवा के क्षेत्र में1997 में भारत रत्न से सम्मानित होने वाली महिला थीं अरूणा आसफ अली। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाली अरूणा आसफ अली 1958 में दिल्ली की पहली मेयर बनी थीं। मेयर बनकर उन्होने दिल्ली के विकास, सफाई और स्वास्थ्य आदि के लिए बहुत अच्छा काम किया और नगर निगम की कार्यप्रणाली में सुधार किए।
एमएस सुब्बुलक्ष्मी
कर्नाटक शास्त्रीय गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी को 1998 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। कला के क्षेत्र में सम्मान पाने वाली वो पहली महिला थीं। उन्हें 1974 में मेग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। एमएस सुब्बुलक्ष्मी पहली भारतीय थी जिन्होंने सयुक्त राष्ट्र संघ की सभा में संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया।
लता मंगेशकर
एमएस सुब्बुलक्ष्मी के बाद स्वर कोकिला लता मंगेशकर को भारत रत्न से 2001 में नवाजा गया। कला के क्षेत्र में यह सम्मान पाने वाली लता मंगेशकर दूसरी महिला बनीं। उनकी आवाज की वजह से उन्हें भारत की नाइटिंगेल भी कहा जाता है। उन्होने 36 से ज्यादा भाषाओं में गाया है। उन्हें 1989 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी मिला है।
Published on:
10 Aug 2019 01:21 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
