
Rajasthan Expressway : फोटो - AI
Bharatpur-Beawar Green Expressway : भरतपुर-ब्यावर ग्रीन एक्सप्रेस-वे का कार्य शुरू होते ही इंटरचेंज को लेकर सियासत और स्थानीय विरोध तेज हो गया है। जिन किसानों की जमीन इस परियोजना में अधिग्रहित हो रही है, वे अब सवाल उठा रहे हैं कि अगर जमीन उनकी जा रही है तो एक्सप्रेस-वे का फायदा भी उन्हें मिलना चाहिए। सवाई माधोपुर से लेकर जयपुर तक अलग-अलग स्थानों पर इंटरचेंज की मांग जोर पकड़ रही है, जबकि विभाग ने 'कंट्रोल्ड एक्सेस हाईवे का हवाला देकर ज्यादा कट का प्रावधान नहीं किया।
भरतपुर से ब्यावर तक करीब 277 किमी लंब हाईवे बनेगा। लोगों ने क्षेत्रीय विधायक इंदिरा मीणा के समक्ष भी यह बात रखी है। इसके बाद पिछले दिनों इंदिरा मीना उप मुख्यमंत्री और सार्वजनिक निर्माण विभाग की मंत्री दिया कुमारी से इस मुद्दे को लेकर मिल चुकी है। विधायक ने बताया कि मित्रपुरा में इंटरचेंज से 150 से ज्यादा और बामनवास में इंटरचेंज से करीब इतने ही गांवों के लोगों को फायदा मिल सकता है। वहीं जयपुर जिले के माधोराजपुरा में भी इंटरचेंज की मांग की जा रही है।
विधायक एवं कांग्रेस जिला अध्यक्ष इंदिरा मीणा ने कहा कि यदि दोनों स्थानों पर इंटरचेंज (कट) बनाए जाते है तो बामनवास क्षेत्र के हजारों लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापार, कृषि, शिक्षा और रोजगार की गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र सीधे एक्सप्रेस-वे से जुड़ सकेगा। इसके अलावा विधायक ने विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न नई सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने तथा लंबे समय से अधूरी पड़ी सड़क परियोजनाओं को शीघ्र पूरा कराने की मांग भी की।
इंदिरा मीणा ने कहा कि कई स्थानों पर निर्माण कार्य निर्धारित समय सीमा के बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं, जिससे आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने घटिया गुणवत्ता से किए जा रहे निर्माण कार्यों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए ऐसे मामलों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना था कि सार्वजनिक धन से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
विधायक इंदिरा मीणा ने विभिन्न सरकारी विभागों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा, शिक्षा, राजस्व एवं अन्य विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों के पद खाली होने से आमजन को समय पर सरकारी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन पदों को शीघ्र भरने से प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को राहत मिलेगी।
किसी भी हाईवे पर इंटरचेंज बनने से उस क्षेत्र को बहुआयामी विकास की अपार संभावनाएं मिलती हैं। इंटरचेंज यातायात को सुगम बनाता है, जिससे यात्रा का समय कम होता है। कनेक्टिविटी बढ़ती है। आस-पास के शहर, गांव और बाजार सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाते हैं। आर्थिक रूप से यह क्षेत्र में क्रांति ला सकता है। रियल एस्टेट की मांग बढ़ने से जमीन के दाम चढ़ते हैं और स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि होती है। इसके अलावा, बेहतर परिवहन से पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं भी तेजी से विकसित होती हैं। कुल मिलाकर, इंटरचेंज क्षेत्र को आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर मजबूत बनाता है, जिससे समग्र विकास तेज गति से होता है।
गौरतलब है कि 342 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे का मार्ग ब्यावर, अजमेर, टॉक, दौसा, सवाईमाधोपुर और भरतपुर जिलों से होकर गुजरेगा। यह एक्सप्रेसवे ब्यावर के नेशनल हाईवे-58 से शुरू होकर, मसूदा, बांदनवाड़ा, भिनाय, नागोला, केकड़ी, फागी, माधोराजपुरा, टोडारायसिंह, निवाई, लालसोट, निर्झरना, गंगापुर सिटी होते हुए भरतपुर में नेशनल हाईवे-21 पर जाकर मिलेगा। लगभग 14 हजार करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना के लिए करीब 3175 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जाएगी।
Updated on:
29 Jun 2026, 10:40 AM IST
Published on:
29 Jun 2026, 9:19 AM IST
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