
जयपुर। राजस्थान में जयपुर, कोटा और उदयपुर में बजरी की समस्या का समाधान हो सकेगा। वहीं, पूरे राजस्थान में कुल डिमांड की 25 प्रतिशत से भी अधिक बजरी की मांग पूरी की जा सकेगी। सरकार ने आम नागरिकों को बड़ी राहत का दावा करते हुए टोंक जिले में एक और राजसमंद में दो बजरी खनन पट्टे जारी किए हैंं। इन खनन पट्टों से राज्य सरकार को सालाना 50 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। सरकार ने जालौर में दो और भीलवाड़ा में एक बजरी खनन पट्टा पहले ही जारी कर रखा है।
वैधता 13 की जगह 68 माह
माइंस एवं पेट्रोलियम विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान में लंबे समय से चली आ रही वैध बजरी खनन की समस्या और अवैद्य बजरी खनन के कारण आए दिन आ रही समस्याओं के समाधान की राह प्रशस्त हो गई है। पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर खनिज पट्टों के लिए जारी मंशा पत्रों की वैधता को 13 माह के स्थान पर 68 माह कर दिया है। इससे देवली, राजसमंद, नाथद्वारा में बजरी मंशा पत्रोंं की वैधता की राह प्रशस्त होने से तीन लीज जारी हो सकी है। बजरी से संबंधित सभी प्रकरणों की माॅनिटरिंग और समन्वय के लिए अतिरिक्त निदेशक बीएस सोढ़ा को प्रभारी बना रखा है।
राज्य सरकार ने लिखा पत्र
खान एवं गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया ने बताया कि आम लोगों को आसानी से और वैध तरीके से बजरी प्राप्त हो सके इसके लिए विभाग की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के क्रम में राज्य सरकार ने केन्द्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अन्य पट्टों के लिए शीघ्र ही ईसी जारी करने के लिए पत्र लिखा है। अग्रवाल ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से जारी तीन बजरी खनन पट्टों में से टोंक जिले के देवली में एसआर एसोसिएट्स भीलवाड़ा, नरोत्तम सिंह जादौन करौली को राजसमंद और राजसमंद के नाथद्वारा का हिम्मत सिंह शेखावत को खनन पट्टा जारी किया गया है।
राज्य में 70 मिलियन टन बजरी की मांग
एसीएस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार राज्य में 70 मिलियन टन बजरी की मांग है। यह तीन पट्टे जारी होने से कुल मांग की 25 फीसदी से अधिक पूर्ति हो सकेगी। राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम 9 के चार के अनुसार डाइज-नॉन पीरियड अवधि के लिए यह पट्टे जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया गया है कि खनन पट्टे मेें पूर्व में स्वीकृत आदेश 22 मई 2017 की शर्तें यथावत रहेंगी। साथ ही राजस्थान अप्रधान खनिज रियायत नियम 2017 में समय-समय पर होेने वाले संशोधन मान्य होंगे।
Published on:
04 Dec 2021 08:31 pm
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